OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा MP सरकार का मामला! 13% पदों पर भी नजर, SLP दाखिल, याचिका के बाद बढ़ी उम्मीदें

भोपाल। मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने 27 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 9 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आरक्षण बढ़ाने वाले 2019 के कानून को रद्द कर दिया था और OBC वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था बरकरार रखी थी। इसके बाद सरकार ने इस फैसले के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की। इस कदम के बाद नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने उठाया अगला कदम
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण बढ़ाने की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। उस समय राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई और मामला कई साल तक चलता रहा। 9 अक्टूबर 2026 को हाई कोर्ट ने इस कानून को निरस्त कर दिया। अदालत के अनुसार, आरक्षण की सीमा बढ़ाने के लिए जरूरी विशेष परिस्थितियों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं किया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का रास्ता चुना। 16 अक्टूबर को सरकार की ओर से SLP दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
14 प्रतिशत आरक्षण पर क्या है मौजूदा स्थिति?
हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में OBC वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू रहेगी। अदालत ने आरक्षण की कुल सीमा से जुड़े कानूनी नियमों और उपलब्ध आंकड़ों पर भी विचार किया। सरकार की याचिका दाखिल होने से 27 प्रतिशत आरक्षण अपने आप लागू नहीं हो जाता। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई और अदालत के आदेश का इंतजार करना होगा। इसलिए अभ्यर्थियों को आरक्षण से जुड़ी खबरों के साथ आधिकारिक आदेशों पर भी ध्यान देना चाहिए।
13 प्रतिशत पदों पर भी टिकी हैं अभ्यर्थियों की निगाहें
इस मामले का असर सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ा है। विवाद के चलते कई भर्तियों में 13 प्रतिशत पदों से जुड़े परिणाम और नियुक्तियां अलग रखी गई थीं। हाई कोर्ट ने भर्ती एजेंसियों को इन पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के आदेश के अनुसार, 13 प्रतिशत पदों पर अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने की समयसीमा तय की गई है। इससे लंबे समय से परिणाम और नियुक्ति का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, भर्ती से जुड़े वास्तविक बदलाव संबंधित विभागों और भर्ती एजेंसियों के आधिकारिक निर्देशों के अनुसार ही होंगे।
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OBC अभ्यर्थियों को अब सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में OBC महासभा के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान सरकार का पक्ष रखा। सरकार ने OBC वर्ग के हितों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है। वहीं, आरक्षण के अंतिम स्वरूप को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर ध्यान रहेगा।




















