PU Special :OBC Reservation: मप्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लगाई, ओबीसी मंत्री और पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष तटस्थ!

राजीव सोनी,भोपाल। मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 27 फीसदी आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक के बाद सरकार ने तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दाखिल भी कर दी। इस पूरी कवायद में दिलचस्प पहलू यह है कि ओबीसी के हितों की लड़ाई का मसौदा न तो पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने तैयार किया और न ही मप्र पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने। ओबीसी आरक्षण की लड़ाई की तैयारी सामान्य प्रशासन विभाग कर रहा है। सरकार के पास ओबीसी वर्ग के हित संरक्षण के लिए दो बड़े चेहरे है। इनमें पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की मंत्री कृष्णा गौर और मप्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया। इस संवेदनशील मुद्दे पर दोनों ही खामोश हैं। एसएलपी की तैयारी और चर्चा आदि में आयोग और विभाग दोनों का दखल नहीं रहा।
राज्य सरकार को लगा मप्र हाईकोर्ट से झटका
हाईकोर्ट के फैसले ने सरकार के 2019 के उस फैसले को झटका दिया है जिसमें ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 277 फीसदी किया गया था। सरकार ने अजा, अजजा, अोबीसी और ईडब्ल्यूएस को मिलाकर 87 फीसदी का फार्मूला तैयार किया था जिसे कोर्ट ने 50 प्रतिशत की सीमा उल्लंघन के आधार पर रिजेक्ट कर दिया।
आरक्षण प्रतिशत बढ़वाने के लिए भाजपा भी जाएगी कोर्ट
भाजपा संगठन के निर्देश पर पार्टी की ओर से ओबीसी वर्ग के विधायक प्रदीप पटेल सहित दो विधायक मामले में विजयादशमी के बाद कोर्ट में अपील करेंगे। बताया जाता है कि पार्टी को यह आशंका भी सता रही है कि सुप्रीम कोर्ट में यदि मामला अनुकूल नही रहा तो इसका राजनीतिक नुकसान भाजपा को होगा। इसलिए पार्टी ने भी कोर्ट में अपनी ओर से लड़ाई का मोर्चा खोलने का फैसला किया है। 'पीपुल्स समाचार' से चर्चा में भाजपा विधायक प्रदीप पटेल ने स्वीकार किया कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर वह तैयारी कर रहे हैं। दशहरे के बाद अपील दाखिल करेंगे।
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सात साल से मामला सुर्खियों में
बताया जाता है कि 2019 में जब कमलनाथ सरकार 14 से 27 प्रतिशत आरक्षण का अध्यादेश लाई थी तभी से यह मामला ओबीसी राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मप्र में ओबीसी आबादी 52 फीसदी से ज्यादा है। इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए यह मुद्दा निर्णायक बढ़त दिलाने वाला है।
विभाग से सुझाव आदि नहीं मांगे गए
इस बारे में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि ओबीसी आरक्षण के मामले में फिलहाल विभागीय स्तर पर कोई सुझाव आदि नहीं मांगे गए। एसएलपी का मसौदा सामान्य प्रशासन विभाग में ही तैयार हुआ।
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पिछले साल सर्वे रिपोर्ट सौंपी थी
मप्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि आयोग ने पिछले साल अगस्त 2025 में सरकार को ओबीसी के संबंध में सर्वे रिपोर्ट जरूर सौंपी थी। आरक्षण के मुद्दे पर अभी कोई विषय चर्चा में नहीं आया।




















