पत्नी को 10 हजार, बच्चों को 3-3 हजार गुजारा भत्ता दें, हाईकोर्ट ने उज्जैन परिवार न्यायालय का आदेश रखा कायम

इंदौर। पत्नी को 10 हजार और दो बच्चों को 3-3 हजार रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने के उज्जैन परिवार न्यायालय के आदेश में हाईकोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया। पति सुमित भसीन ने राशि घटाने, जबकि पत्नी उपासना भसीन ने बढ़ाने की मांग की थी। जस्टिस आलोक अवस्थी ने 7 अक्टूबर को दोनों की पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दीं।
वास्तविक आय का सही आकलन नहीं करने का हवाला
उज्जैन परिवार न्यायालय ने 31 जुलाई 2024 को पत्नी को 10 हजार और बेटी कशिका तथा बेटे हेमंक को 3-3 हजार रुपए प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। सुमित और उपासना का विवाह 25 मई 2010 को हुआ था। उनकी बेटी करीब 10 और बेटा चार वर्ष का है। पति ने दलील दी कि परिवार न्यायालय ने उसकी वास्तविक आय का सही आकलन नहीं किया और तय राशि उसकी आर्थिक स्थिति के मुकाबले अधिक है। उसने पत्नी के शिक्षित होने और दांपत्य अधिकारों की बहाली के आदेश के बावजूद साथ नहीं रहने का तर्क भी दिया।
पत्नी बोली-मौजूदा भत्ते से गुजारा नहीं होता
वहीं, पत्नी ने कहा कि पति की आय अधिक है और मौजूदा गुजारा भत्ता बच्चों की पढ़ाई व अन्य जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है। उसने पति के नाम ट्रक, वाहन कलपुर्जों के कारोबार और किराये से आय होने का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि पति ने अपने नाम पर दो ट्रक होने और पारिवारिक कारोबार भसीन मोटर्स से आय मिलने की बात स्वीकार की थी। पत्नी के पास स्वयं और बच्चों का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त आय नहीं है। परिवार न्यायालय ने यह भी माना था कि पत्नी को पति और उसके परिवार की प्रताड़ना व उपेक्षा के कारण अलग रहने को मजबूर होना पड़ा।
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दोनों पक्षों को नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट ने कहा कि परिवार न्यायालय ने दोनों पक्षों के आय और संपत्ति संबंधी शपथपत्रों तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार कर गुजारा भत्ता तय किया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुनरीक्षण में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है, जब निचली अदालत के आदेश में गंभीर कानूनी त्रुटि या साक्ष्यों के विपरीत निष्कर्ष हो। ऐसा कोई आधार नहीं मिलने पर पति की राशि घटाने और पत्नी की राशि बढ़ाने की मांग खारिज कर दी गई।
इधर, एसडीएम पति को पत्नी को देने होंगे 20 हजार रुपए हर माह
गरोठ में एसडीएम के पद पर पदस्थ राहुल चौहान को पत्नी निर्मला को हर महीने 20 हजार रुपए भरण-पोषण देना होंगे। इंदौर फैमिली कोर्ट के प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश डॉ. कुलदीप जैन ने यह आदेश जारी किया है। कोर्ट ने भरण-पोषण की राशि 21 अप्रैल 2023 से देय मानी है। यानी भुगतान की गणना आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से होगी। पति को हर महीने की 10 तारीख तक राशि चुकानी होगी।
पांच महीने पहले भी दिए थे 20 हजार हर माह भुगतान के आदेश
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित अवधि में यदि पति किसी अन्य आदेश के तहत भरण-पोषण की राशि पहले ही चुका चुका है, तो उसका समायोजन किया जाएगा। इससे एक ही अवधि के लिए दोबारा भुगतान नहीं करना होगा। निर्मला और राहुल चौहान के बीच भरण-पोषण का मामला पहले भी चर्चा में रहा है। मई 2026 में फैमिली कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर राहुल चौहान को पत्नी को 20 हजार रुपए प्रतिमाह देने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद नियमित भुगतान नहीं होने पर जुलाई 2026 में कोर्ट ने उनके खिलाफ वसूली वारंट जारी करने के निर्देश दिए थे। उस समय बकाया राशि 5.56 लाख रुपए बताई गई थी। अब भरण-पोषण के आवेदन पर अंतिम फैसला सामने आया है। नए आदेश में भी पत्नी के लिए 20 हजार रुपए प्रतिमाह की राशि निर्धारित की गई है और इसकी गणना अप्रैल 2023 से करने के निर्देश दिए गए हैं।
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