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Manipur Violence : राहुल बोले- मणिपुर जल रहा, यूरोपीय संसद में भी चर्चा; लेकिन मोदी ने एक शब्द नहीं कहा

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मणिपुर हिंसा को लेकर पीएम की चुप्पी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने शनिवार को ट्वीट कर लिखा, मणिपुर जल रहा। यूरोपियन संसद ने भी भारत के आंतरिक मामले पर चर्चा की। पीएम ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा। बता दें कि, मणिपुर में 3 मई से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हिंसा जारी है।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कही ये बात

राहुल गांधी ने ट्वीट किया और कहा, ‘मणिपुर जल गया। EU संसद ने भारत के आंतरिक मामले पर चर्चा की। पीएम ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा। इस बीच, राफेल ने उन्हें बैस्टिल डे परेड का टिकट दिला दिया।’ प्रधानमंत्री मोदी दो दिन के फ्रांस दौरे पर गए थे। वे फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस (बैस्टिल डे परेड) में शुक्रवार को बतौर अतिथि शामिल हुए। फ्रांस सरकार की तरफ से पीएम को आमंत्रित किया गया था।

यूरोपियन संसद में भारत के आंतरिक मामले पर चर्चा

गुरुवार को यूरोपीय संघ की संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें मणिपुर हिंसा को लेकर भारत में मानवाधिकारों की स्थिति पर बात की, साथ ही आरोप लगाया कि भारत में अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति असहिष्णुता के कारण मौजूदा स्थिति बनी हुई है।

29 जून को मणिपुर गए थे राहुल

राहुल गांधी ने 29 जून को मणिपुर का दो दिन का दौरा किया था। कांग्रेस ने राहुल के राहत शिविरों में पहुंचने की तस्वीरें ट्वीट करते हुए लिखा था- ‘प्यार, भाईचारा और शांति का संदेश लेकर राहुल गांधी जी मणिपुर पहुंचे हैं। कल वे हिंसा के पीड़ितों और सिविल सोसाइटी के लोगों से मिले। उनका दुख बांटा, उनके आंसू पोछे, उन्हें हिम्मत दी। ये भरोसा दिलाया कि सब ठीक हो जाएगा। मणिपुर में नफरत के खिलाफ मोहब्बत की ये यात्रा आज भी जारी है।’

क्या है मामला ?

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़प हुई थी। दरअसल, ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने तीन मई को ‘आदिवासी एकता मार्च’ निकाला। ये रैली चुरचांदपुर के तोरबंग इलाके में निकाली गई। इसी रैली के दौरान आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसक झड़प हो गई। हालात को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।

शाम तक हालात इतने बिगड़ गए कि राज्य सरकार ने केंद्र से मदद मांगी। जिसके बाद सेना और पैरामिलिट्री फोर्स की कंपनियों को वहां तैनात किया गया। ये रैली मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के खिलाफ निकाली गई थी। मैतेई समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा देने की मांग हो रही है

मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मैतेई समुदाय की है और ये मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासियों- नगा और कुकी की आबादी 40 प्रतिशत है और ये पर्वतीय जिलों में रहते हैं।

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