न एटीएम लिया, न यूपीआई को उपयोग फिर भी पंचायत सचिव के दो बैंक खातों से 9.42 लाख की ठगी

हरसूद । खालवा विकासखंड में ग्राम पंचायत कालाआम खुर्द के सचिव के दो बैंक खातों से साइबर ठगी का मामला सामने आया है। सचिव श्यामलाल यादव के मुताबिक, 5 से 10 अक्टूबर के बीच उनके खातों से यूपीआई के जरिए करीब 9 लाख 42 हजार रुपए निकालकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। खास बात यह है कि, सचिव ने तो एटीएम कार्ड बनवाया था और न ही वे यूपीआई या किसी अन्य ऑनलाइन भुगतान माध्यम का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद पांच दिनों में उनके खातों से 103 बार लेन-देन किया गया। जोगीबेड़ा निवासी श्यामलाल यादव पिता श्रीपाल यादव ने इस मामले में खालवा थाना प्रभारी को आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बैंक खातों से निकाली गई राशि वापस दिलाने की मांग भी की है। पीड़ित के अनुसार, दोनों खातों में कुल 11 लाख 4 हजार 600 रुपए जमा थे। इनमें से बड़ी रकम निकलने के बाद उन्हें ठगी का पता चला।
दो खातों से निकाली गई रकम
श्यामलाल यादव के मुताबिक, उनका एक खाता बैंक ऑफ इंडिया की आशापुर शाखा में है। इस खाते में 3 लाख 4 हजार 600 रुपए जमा थे। वहीं, बैंक ऑफ इंडिया की खालवा शाखा में उनके दूसरे खाते में 8 लाख रुपए जमा थे। दोनों खातों में कुल 11 लाख 4 हजार 600 रुपए की राशि थी। 5 से 10 अक्टूबर के बीच अज्ञात व्यक्ति ने यूपीआई के माध्यम से दोनों खातों से रकम निकाल ली। आशापुर शाखा के खाते से करीब 2 लाख 80 हजार रुपए और खालवा शाखा के खाते से करीब 6 लाख 62 हजार रुपए निकाले जाने का उल्लेख है। इस तरह कुल करीब 9 लाख 42 हजार रुपए की राशि निकाली गई। यह रकम 103 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ट्रांसफर की गई।
खाते से रकम निकलती रही, मैसेज भी नहीं आए
पीड़ित के मुताबिक, खातों से लगातार ट्रांजेक्शन होने के बावजूद उन्हें अधिकांश लेन-देन के मैसेज मोबाइल पर नहीं मिले। शनिवार देर शाम खाते से 15 हजार 500 रुपए कटने का मैसेज आया, जिसके बाद उन्हें संदेह हुआ। बैंक खाते की जानकारी लेने पर पता चला कि पांच दिनों के दौरान बड़ी रकम निकाली जा चुकी है। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। साथ ही खालवा और हरसूद थाने पहुंचकर पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। अब उन्होंने खालवा थाना प्रभारी को आवेदन देकर दोनों बैंक खातों के लेन-देन की जांच कराने की मांग की है।
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बैंक कर्मचारियों पर भी जताया संदेह
श्यामलाल यादव ने बैंक कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि खातों से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने बैंक से संपर्क किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक कर्मचारियों द्वारा खाते का स्टेटमेंट उपलब्ध कराने में भी मदद नहीं की जा रही है। पीड़ित ने जताई है कि रकम निकालने के मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि, बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता को लेकर अभी कोई तथ्य सामने नहीं आया है। यह पीड़ित की ओर से जताई गई आशंका है। उन्होंने पुलिस से दोनों खातों के ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटाकर पूरे मामले की जांच कराने और राशि वापस दिलाने की मांग की है।
बैंक ट्रांजेक्शन की जांच से खुलेगा मामला
मामले में अब दोनों बैंक खातों से हुए लेन-देन और जिन खातों में रकम ट्रांसफर की गई, उनकी जानकारी अहम होगी। 103 ट्रांजेक्शन के जरिए राशि निकाले जाने की बात सामने आने के बाद यह पता लगाना जरूरी है कि रकम किन खातों में पहुंची और यूपीआई के माध्यम से ट्रांजेक्शन किस तरह किए गए। टीआई अनुपमसिंह के अनुसार, आवेदन मिला हैं, मामले की जांच की जा रही हैं।
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