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ट्रेन की टक्कर से घायल 2 बाघ शावकों का रेस्क्यू, एक कोच की एसी ट्रेन से लाए गए भोपाल, उपचार के लिए वन विहार भेजा

दोनों शावक गंभीर, कमर के नीचे सेंसेशन नहीं, मिडघाट पर फेंसिंग न होने से जा रही वन्य प्राणियों की जान

भोपाल। बुधनी के मिडघाट पर सोमवार को ट्रेन से टकरा कर घायल हुए दोनों बाघ शावकों का पहली बार एक कोच की स्पेशल ट्रेन से रेस्क्यू किया गया। इन्हें उपचार के लिए रेलवे स्टेशन से सीधे वन विहार भेजा गया। ये दोनों मादा शावक हैं, जिनकी कमर के नीचे का हिस्सा रिस्पांस नहीं कर रहा है। मेडिकल टीमें लगातार इनकी हालत पर नजरें बनाए हुए हैं। वहीं, घने जंगलों के बीच स्थित मिडघाट में रेलवे ट्रैक के दोनों ओर फेंसिंग नहीं होने से 2015 से अब तक रेल गाड़ियों से वन्य प्राणियों के टकराने की 9 घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 4 बाघ, 4 तेंदुए और 1 भालू के साथ दर्जनभर वन्य प्राणियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।

मां के नजदीक रहने से लेट हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

मिडघाट में सोमवार को ट्रेन से टकराए तीन शावकों में से एक नर शावक की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि बुरी तरह घायल दोनों मादा शावक उसकी बहनें हैं। इनके बचाव और उपचार के लिए सोमवार को पहुंची मेडिकल और वनअमले की टीमों को इन शावकों की बाघिन मां के रौद्र रुप के कारण जान बचाकर लौटना पड़ा था। इस कारण इन दोनों शावकों का रेस्क्यू एक दिन टालना पड़ा। मंगलवार दोपहर वनविहार के डॉ. अतुल गुप्ता और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डॉ. गुरुदत्त शर्मा के साथ मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। वहीं सीहोर कलेक्टर राजीव शर्मा, सीसीएफ भोपाल राजेश खरे, डीएफओ सीहोर एमएस डावर, रेंजर महिपाल सिंह सहित वन विभाग का पूरा अमला मौके पर पहुंचा। यहां पर टीम दो हिस्सों में बंट गई। डॉ. गुरुदत्त शर्मा ने मृत शावक का पीएम किया, जिसके बाद उसका वहीं अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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एक डिब्बे की स्पेशल ट्रेन चलाई गई

वन अधिकारियों ने सोमवार को ही रेल प्रबंधन से बात की। इसके बाद मंगलवार को बुधनी स्टेशन पर एक एसी कोच वाली स्पेशल रेस्क्यू ट्रेन पहुंची। इस दौरान इस रूट पर ट्रैफिक रोककर दूसरे ट्रैक से बाकी ट्रेनों को निकाला गया। यहां डॉ. अतुल गुप्ता की टीम दोनों घायल शावकों पर जाल डालकर सावधानी से उठाकर स्ट्रेचर पर रखकर ट्रेन तक लाए। ट्रेन में लाते ही दोनों शावकों का परीक्षण करके दवाएं दी गईं। यह ट्रेन शाम 5 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंची, जहां पहले से तैयार एंबुलेंस के जरिए दोनों को वन विहार पहुंचाया गया।

जान बचाकर भागना पड़ा था टीम को

सोमवार को रेस्क्यू का पह्ल प्रयास नाकाम होने के बारे में टीम का हिस्सा रहे एक अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही वनविहार भोपाल से मेडिकल टीम और सीहोर जिले का वन अमला मौके पर रवाना हुआ था। मेर रोड से उतरकर ये टीमें दो किमी पैदल चलकर घटनास्थल पर पहुंचे। यहां बाघ शावकों का ढंग से निरीक्षण भी नहीं हो सका कि रेलवे ट्रैक के दूसरी ओर शावकों की मां की दहाड़ सुनाई दी। मां बाघिन अपने बच्चों के एक्सीडेंट के कारण बार दर्द से कराहने से बिफरी हुई थी। इसके बाद उनके पास भीड़ देखकर गुर्राते हुए रेस्क्यू टीम की ओर बढ़ी। ऐसे में टीम में खौफ फैल गया, क्योंकि इस हालात के बारे में पहले सोचा तक नहीं गया था। सामने गुस्साई बाघिन को देख पूरी टीम ने बचाव के लिए शोर मचाना शुरु कर दिया और पीछे हटने लगे। शावकों से दूर जाती टीम को देख बाघिन थोड़ा ठिठकी, लेकिन घात लगाते हुए फिर बढ़ने लगी। इसके बाद डर से कांप रही पूरी टीम किसी तरह वहां से भागते हुए पीछे हटी और बिना रेस्क्यू ही लौट आई थी।

फेंसिंग न होने से जान गंवा रहे जंगली जानवर

मिडघाट पर तीसरी रेलवे लाइन का काम शुरु होते ही वन्य प्राणियों की सुरक्षा का मुद्दा उठा था। उस समय रेलवे ने वन विभाग को वादा किया गया था कि ट्रैक के दोनों ओर फेंसिंग की जाएगी। इससे टाइगर समेत अन्य वन्य प्राणी ट्रैक पर नहीं आ पाएंगे। 2015 में फेंसिंग का लिए काम शुरु भी हुआ, लेकिन आधा-अधूरा ही रहा। अभी भी फेंसिंग लगाने की सामग्री वहीं पड़ी हुई है, लेकिन आधी से ज्यादा फेंसिंग अब तक नहीं लगी है। इसका नतीजा है कि आए दिन यह लापरवाही वन्य प्राणियों की जान के लिए खतरा बनी हुई है।

कमर के नीचे रिस्पांस नहीं

दो फीमेल शावक हैं, जो कि शॉक्ड हैं। उनकी कमर के नीचे रिस्पांस नहीं है। फिलहाल अत्यंत गंभीर हैं, रेस्क्यू करते ही ट्रेन में ही इलाज शुरु कर दिया गया है। वन विहार में टीम लगातार नजर बनाए हुए है।

– डॉ. अतुल गुप्ता, पशु चिकित्सक, वन विहार

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वैसे तो रेलवे में फेंसिंग लगाने का कोई प्रावधान नही है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में मिडघाट पर फॉरेस्ट के साथ मिलकर फेंसिंग का काम जल्द पूरा कराएंगे। इस बारे में वन सरंक्षक भोपाल से बात भी हो चुकी है।

– देवाशीष त्रिपाठी, डीआरएम, भोपाल

(इनपुट- विजय एस. गौर)

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