
रांची/ पटना। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और उसके गठबंधन सहय लगभग 40 विधायक कल होने वाले शक्ति परीक्षण में शामिल होने के लिए हैदराबाद से आज रांची लौट रहे हैं। सभी 37 विधायक और अन्य नेता चार्टर प्लेन से रांची पहुंचेंगे। रांची में सभी को सर्किट हाउस लाया जाएगा। सोमवार को झारखंड विधानसभा के सत्र से पहले 10 बजे सभी को विधानसभा ले जाया जाएगा, जहां वे नवनियुक्त चंपई सरकार के बहुमत साबित करने के लिए वोटिंग करेंगे।
इधर, नीतीश सरकार के फ्लोर टेस्ट तक कांग्रेस विधायक बिहार नहीं लौटेंगे। NDA सरकार के फ्लोर टेस्ट को लेकर कांग्रेस में संभावित टूट का डर पार्टी आलाकमान को सताने लगा है। ऐसे में कांग्रेस ने फ्लोर टेस्ट से अपने विधायकों को बिहार से बाहर हैदराबाद भेज दिया है।
JMM ने विधायकों को हैदराबाद भेजपा था
फ्लोर टेस्ट को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि महागठबंधन की सरकार के पास लिखित में 43 विधायकों का समर्थन है। फ्लोर टेस्ट के बाद 7 फरवरी को मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा। दरअसल, 2 फरवरी को चंपई सोरेन ने झारखंड के 12वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। उन्हें बहुमत सिद्ध करने के लिए राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने 10 दिनों का समय दिया। इसी बीच किसी तरह की टूट की आशंका से बचने के लिए JMM-कांग्रेस के 37 विधायकों को हैदराबाद भेजा दिया गया था।
फ्लोर टेस्ट में पूर्व CM रहेंगे मौजूद
झारखंड के पूर्व CM हेमंत सोरेन विधानसभा में विश्वास मत के दौरान मौजूद रहेंगे। रांची की विशेष कोर्ट ने शनिवार को हेमंत को इसकी अनुमति दे दी। झारखंड के नए सीएम चंपई सोरेन 5 फरवरी को विधानसभा में विश्वास मत का सामना करेंगे। इसके लिए 5 और 6 को झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। सत्र के पहले दिन विधायकों की परेड होगी। फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा। सूचना है कि 7 फरवरी को मुख्यमंत्री चंपई सोरेन मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे।
23 साल में 11 बार बदले CM
झारखंड में 23 साल में 11 बार मुख्यमंत्री बदले हैं। इनमें अर्जुन मुंडा और शिबू सोरेन तीन-तीन बार मुख्यमंत्री बने। रघुवर दास एकमात्र ऐसे सीएम रहे, जिन्होंने पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा किया।
नीतीश सरकार के फ्लोर टेस्ट तक बिहार नहीं लौटेंगे कांग्रेसी विधायक
इधर, बिहार में भाजपा के साथ मिलकर नई सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार को कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश में अपने विधायकों को हैदराबाद के लिए रवाना कर दिया है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बीते दिनों राज्य में महागठबंधन और आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन से किनारा कर लिया था। इसके बाद उन्होंने भाजपा से हाथ मिलाते हुए फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसी की वजह से अब उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा।
12 फरवरी को ही क्यों होगा फ्लोर टेस्ट
शनिवार को दिल्ली में बिहार कांग्रेस के विधायकों की एक बैठक हुई थी। इस बैठक में 19 में से 17 विधायकों ने शिरकत की थी। ऐसे में उनमें कोई टूट न हो जाए यह सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने उन्हें हैदराबाद भेजने का फैसला लिया है। राज्य की नई एनडीए सरकार को बिहार विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन बहुमत साबित करना था। लेकिन अब यह तारीख 12 फरवरी कर दी गई है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि राज्यपाल 9 से 11 फरवरी तक उपलब्ध नहीं रहेंगे। बता दें कि 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में भाजपा के 78 विधायक हैं। वहीं, अब एनडीए का हिस्सा नीतीश कुमार की जदयू के 45, हम (हिंदुस्तान अवाम मोर्चा) के 4 और एक निर्दलीय विधायक है। बहुमत के लिए 122 विधायकों की जरूरत होती है। ऐसे में कुल 128 विधायकों के साथ बहुमत साबित करने में नीतीश को कोई चुनौती मिलती नहीं दिख रही है।
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