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धार भोजशाला केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला : ASI की समय बढ़ाने की मांग मानी, 2 महीने और चलेगा सर्वे; 4 जुलाई के पहले देनी होगी फाइनल रिपोर्ट

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धार भोजशाला केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला : ASI की समय बढ़ाने की मांग मानी, 2 महीने और चलेगा सर्वे; 4 जुलाई के पहले देनी होगी फाइनल रिपोर्ट
Dhar Bhojshala ASI Survey Update धार भोजशाला में जारी ASI सर्वे को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने एएसआई की याचिका को स्वीकार कर ली है। पिछली सुनवाई में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने सर्वे के लिए 8 हफ्ते का समय मांगा था। इंदौर हाई कोर्ट ने सर्वे के लिए आठ सप्ताह का समय और दिया है। अब एएसआई सर्वे के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सकेगा। इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को कोर्ट से झटका लगा है। मुस्लिम पक्ष ने सर्वे रोकने के लिए कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है।

4 जुलाई के पहले पेश करनी होगी रिपोर्ट

कोर्ट ने धार भोजशाला सर्वे के लिए एएसआई टीम को 8 हफ्ते का समय दिया है और 4 जुलाई से पहले फाइनल रिपोर्ट सौंपने को कहा है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम को ये रिपोर्ट हाई कोर्ट की इंदौर बेंच को सौंपना होगा।

अब जीपीआर मशीन का होगा इस्तेमाल

ASI के मुताबिक, सर्वे में अब जीपीआर मशीन इस्तेमाल किया जाएगा। इस मशीन के लिए नेशनल ज्योग्राफिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (NGRI) से संपर्क किया है। वहां से अनुमति मिलते ही मशीन से सर्वे शुरू हो जाएगा। यह अत्यंत धीमी प्रक्रिया है। इसलिए उसने आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। https://twitter.com/psamachar1/status/1784914866798506099

यह है भोजशाला से जुड़ा विवाद

भोजशाला का नाम राजा भोज के नाम पर है। धार के जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी यह जानकारी दी जाती है। इस स्थान को पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यूनिवर्सिटी माना जाता है, जिसमें वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा स्थित थी। हालांकि विवाद इस बात को लेकर हैं कि हिंदू पक्ष कहता है कि इसे मुस्लिम शासक ने मस्जिद में परिवर्तित कर दिया था। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह मुस्लिम धर्म स्थल है और वहां सालों से इबादत की जा रही है। हालांकि फिलहाल वाग्देवी की प्रतिमा लंदन के एक म्यूजियम में है।

यह है भोजशाला का इतिहास

हिंदू पक्ष का कहना है कि यह सरस्वती मंदिर है। सदियों पहले मुसलमानों ने यहां मौलाना जलालुद्दीन की मजार बनाई थी। भोजशाला में आज भी देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत में श्लोक लिखे हुए हैं। अंग्रेज भोजशाला में लगी वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन लेगए थे। याचिका में भी यही कहा गया है कि भोजशाला हिंदुओं का उपासना स्थल है और नमाज के नाम पर भीतर के अवशेष मिटाए जा रहे हैं। ये भी पढ़ें- Bhojshala ASI Survey : धार भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से झटका, ASI सर्वे पर रोक लगाने से किया इनकार
Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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