
हिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज मनाई जाती है। इस बार हरियाली तीज 31 जुलाई यानि आज मनाई जा रही है। इसको श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता है। हरियाली तीज सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास पर्व होता है। इसमें महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रहते हुए और श्रृंगार करके भगवान शिव और मां गौरी की आराधना करती हैं।
पौराणिक मान्यता क्या है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं।
मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा का विधान है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं, कुंवारी महिलाएं मनवांछित वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखते हैं।
हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि प्रारम्भ – जुलाई 31, 2022 को सुबह 02 बजकर 59 मिनट पर शुरू
तृतीया तिथि समाप्त – अगस्त 01, 2022 को सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर खत्म
हरियाली तीज पूजन सामग्री
केले के पत्ते, बेल पत्र, धतूरा, अंकव पेड़ के पत्ते, तुलसी, काले रंग की गीली मिट्टी, जनेऊ, शमी के पत्ते, धागा और नए वस्त्र। माता पार्वती जी के श्रृंगार के लिए चूडियां, महौर, सिंदूर, बिछुआ, मेहंदी, खोल, सुहाग पूड़ा, कुमकुम और कंघी। इसके अलावा पूजा में नारियल, अबीर, चंदन, कलश, तेल और घी, कपूर, दही, चीनी, शहद ,दूध और पंचामृत।
हरियाली तीज पूजन विधि
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त पर उठकर स्नान कर लें और साफ कपड़े पहन लें।
- मंदिर की अच्छे से सफाई करें और एक चौकी रखें।
- चौकी को गंगाजल से साफ कर लें।
- चौकी पर सफेद या लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
- मिट्टी से भगवान शिव,पार्वती और गणेश जी की मूर्ति बनाएं। आप चाहे तो फोटो का भी रख सकती हैं।
- मूर्ति की स्थापना हो जाने के बाद सुहाग की सभी पूजा सामग्री को एकत्रित करते हुए पूजा आरंभ करें और माता को श्रृंगार की
- सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भगवान शंकर को भी वस्त्र इत्यादि समर्पित करें।
- फिर भगवान शिव को भांग, धतूरा, अक्षत, बेल पत्र, श्वेत फूल, गंध, धूप, वस्त्र आदि चढ़ाएं।
- इसके बाद हरियाली तीज की कथा सुनें और फिर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
- इसके बाद भगवान को भोग लगाएं।
झूला झूलाने की परंपरा
हरियाली तीज पर सुहागिनें सोलह शृंगार कर हाथों में मेहंदी लगाती हैं। नवविवाहित वधू यह पर्व मायके में मनाती हैं और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की मंगल कामना करती हैं। हरियाली तीज पर सभी सुहागिन महिलाएं एकत्रित होकर पूजा-पाठ के बाद झूला झूलती हैं और मंगल गीत गाती हैं। इस दौरान सावन के गीत भी गाए जाते हैं।
(नोट: यहां दी गई सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। हम मान्यता और जानकारी की पुष्टि नहीं करते हैं।)