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मंत्री कृष्णा गौर के बेटे से 3.20 लाख की ठगी, भोपाल से एक आरोपी गिरफ्तार, सरगना की तलाश जारी

भोपाल। मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर के बेटे आकाश गौर के साथ ठगी के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को भोपाल से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी का नाम सैफ अली चऊस है, जो इस ठगी रैकेट में शामिल था। ठगों ने महिंद्रा कंपनी में लेबर सप्लाई और ट्रांसपोर्ट का ठेका दिलाने का झांसा देकर आकाश गौर से 3 लाख 20 हजार रुपए ठगे थे। मामले में मुख्य आरोपी राकेश यादव अभी भी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

फर्जी मेल आईडी से बैंक को किया मेल

आरोपियों ने ठगी के लिए साइबर क्राइम भोपाल के डीएसपी ([email protected]) के नाम से मिलती-जुलती फर्जी ईमेल आईडी का उपयोग किया। फर्जी ईमेल आईडी ([email protected]) के जरिए बैंक खाते खोलने के लिए साइबर क्राइम भोपाल की वैध ईमेल का भ्रम पैदा कर ठगों ने अपना सहकारी बैंक से खाता खुलवाने का प्रयास किया। बैंक को ईमेल आईडी में शक होने पर उन्होंने साइबर क्राइम भोपाल को सूचित किया, जिसके बाद इस फर्जी आईडी की जांच करवाई गई।

कमीशन निकालकर रैकेट के सरगना को पैसे भेजे

सैफ अली चऊस के बैंक खाते में ठगी के पैसे ट्रांसफर कराए गए थे। सैफ ने उसमें से कमीशन काटकर बाकी राशि मुख्य आरोपी राकेश यादव को दे दी। जांच के दौरान मुंबई स्थित बैंक ऑफ इंडिया और अपना सहकारी बैंक के खाते को होल्ड कराया गया। इसके अलावा, बैंक की जांच में पाया गया कि फर्जी ईमेल आईडी का उपयोग करने वाले सैफ अली का मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी गोडैडी डोमेन प्रोवाइडर से लिंक पाए गए।

मुख्य आरोपी की तलाश तेज

फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी राकेश यादव की तलाश में सक्रिय है। साथ ही, इस पूरे रैकेट में अन्य संभावित आरोपियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। पुलिस की सतर्कता और बैंक के संदेह के चलते इस ठगी के रैकेट का पर्दाफाश हुआ।

क्या है मामला

आकाश गौर ने शिकायत दर्ज कराई कि 20 मार्च 2024 को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच उन्हें एक फोन आया, जिसमें एक व्यक्ति ने प्राइवेट कंपनी में लेबर सप्लाई के टेंडर का प्रस्ताव दिया। फोन करने वाले ने खुद को आरके यादव बताया और आकाश से पूछा कि क्या वह लेबर सप्लाई का काम करते हैं। आकाश ने जवाब दिया कि वह ठेकेदारी करते हैं, जिस पर व्यक्ति ने उन्हें टेंडर मिलने का आश्वासन दिया। उसने बताया कि टेंडर के लिए क्यूआर कोड पर एंट्री करनी होगी और वेंडर कोड जनरेट करने के लिए शुल्क जमा करना होगा। कुछ समय बाद उसने वॉट्सऐप पर एक क्यूआर कोड भेजा और आकाश को निर्देश दिया कि वह शुल्क जमा करें। आकाश ने विश्वास कर 3 लाख 19 हजार रुपए अलग-अलग बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद व्यक्ति ने फोन बंद कर लिया और संपर्क नहीं किया।

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