पल्लवी वाघेला, भोपाल। सिलेंडर को लेकर क्राइसिस अभी खत्म नहीं हुआ है। इस बीच जहां परिवारों में कलह की खबरें सामने आ रही थीं तो वहीं अब ऐसे मामले भी प्रकाश में आए जहां यह बच्चों की नाराजगी की वजह भी बना। यहां तक कि तैश में आए बच्चों ने घर छोड़ने जैसा कदम भी उठा लिया। मंगलवार को एक बच्चे को परिवार को सौंपा गया। यह 13 वर्षीय किशोर पीएम से मिलने दिल्ली जाने निकला था ताकि संयुक्त परिवार में सिलेंडर के कारण हो रही कलह का हल मिल जाए।
रेस्क्यू होने पर इंदौर जिले के बच्चे ने बताया कि घर में दादी-चाची और मां में हर रोज खाना बनाने और गैस के इस्तेमाल को लेकर झगड़ रहे हैं। मां और चाची अलग रहने की बात करती हैं, इससे उसे डर लग रहा है। मामले में परिवार को समझाइश देते हुए किशोर को परिवार को सौंपा गया। यह अकेला मामला नहीं। बीते 17 दिनों में ऐसे चार बच्चों के मामले सामने आए हैं, जिन्होंने रेस्क्यू होने पर सिलेंडर क्राइसिस को अपने घर छोड़ने की वजह बताया।
भोपाल का 12 वर्षीय बच्चा घर छोड़कर झांसी दादी के घर जा रहा था, इसी बीच बीना में रेस्क्यू किया गया। किशोर ने कहा कि मां उसकी पसंद का खाना नहीं बना रही है। बच्चे को हलीम खाना था जो धीमी आंच पर पकता है। मां ने यह कहकर मना कर दिया कि अभी सिलेंडर की दिक्कत है। अभी वहीं खाना बनेगा जिसमें गैस कम खर्च हो। बच्चे ने कहा कि मां रोज कुकर में हरी सब्जी-दाल बना रही है। इस बात से उसे गुस्सा आ गया और वो दादी के घर जा रहा था।
[featured type="Featured"]
छतरपुर क्षेत्र की 17 वर्षीय किशोरी मुंबई जाने निकली थी। वह आगे किसी कुकिंग रियलिटी शो का हिस्सा बनना चाहती है। किशोरी ने बताया कि वह नई-नई डिशेज बनाती है और इसकी रील्स शूट करती है। सिलेंडर की कमी की संभावना के बाद से ही मां उसे रील बनाने में रोकने-टोकने लगी है। नए एक्सपेरिमेंट भी नहीं करने दे रही है। मामले में मां ने कहा कि उन्होंने बेटी को कुछ दिन के लिए मना किया था, लेकिन बेटी ने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
घर में सिलेंडर खत्म होने और ब्लैक में सिलेंडर खरीदने के बाद पति और सास के तानों से परेशान महिला ने गुस्से में 15 साल की किशोरी की पिटाई कर दी। वह गलती से गैस पर खाना चढ़ाकर भूल गई थी। इसके चलते किशोरी घर छोड़कर जा रही थी, लेकिन उसे स्टेशन पर ही रेस्क्यू कर लिया गया।
[breaking type="Breaking"]
इन दिनों अत्यधिक प्रचार प्रसार के माध्यमों, एवं परिवारों में माता पिता,वरिष्ठ जनों द्वारा बच्चों को समयपूर्व पारिवारिक संकटों में पूर्ण चर्चा का स्थान देने के कारण बच्चों में समयपूर्व मैच्योरिटी दिखाई पड़ने लगी है। बच्चे यह साबित करने में लग जाते हैं कि वह स्वयं के निर्णय लेने में सक्षम है। ऐसे में विरोधाभास की स्थिति निर्मित होती है और बच्चे अनुचित कदम भी उठा लेते हैं। इन मामलों में भी कुछ ऐसा ही है, बच्चों को इस माहौल का जो हल अपने हिसाब से समझ आया, उन्होंने उसी पर अमल कर लिया।
दिव्या दुबे मिश्रा, काउंसलर