बेंगलुरु। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने रविवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में ठहरे ओडिशा कांग्रेस विधायकों को रिश्वत देने की कोशिश के मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी से कथित ‘ऑपरेशन लोटस’ का पर्दाफाश हुआ है। उनका आरोप है कि भाजपा ने ओडिशा में विधायकों को तोड़ने की योजना बनाई है। शिवकुमार के मुताबिक 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले प्रत्येक विधायक को पांच करोड़ रुपए तक की पेशकश की जा रही थी।
जानकारी के अनुसार कांग्रेस की ओडिशा इकाई के कुछ विधायक और पदाधिकारी इन दिनों बेंगलुरु के एक निजी रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इस मामले में बेंगलुरु पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि कुछ लोगों ने विधायकों से संपर्क कर उन्हें पैसे का लालच दिया और प्रस्ताव ठुकराने पर धमकाने की कोशिश भी की। फिलहाल आठ विधायक रिसॉर्ट में मौजूद हैं और वे 12 मार्च से वहीं ठहरे हुए हैं।
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शिवकुमार, जो कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि चार लोग विधायकों से संपर्क करने पहुंचे थे और एक स्थानीय व्यक्ति सुरेश उनकी मदद कर रहा था। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने पहले ऑनलाइन माध्यम से संपर्क किया और बाद में सुबह एक विधायक को मिलने के लिए ले गए। शिवकुमार के मुताबिक, उस दौरान प्रत्येक वोट के लिए पांच करोड़ रुपये की पेशकश की गई। हालांकि कांग्रेस विधायक ने साफ कह दिया कि वे बिकने वाले नहीं हैं और तुरंत पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दी।
कर्नाटक पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है। शिवकुमार का कहना है कि पकड़े गए लोगों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वे विधायकों की खरीद-फरोख्त के इरादे से आए थे। कांग्रेस अक्सर ‘ऑपरेशन लोटस’ शब्द का इस्तेमाल भाजपा पर आरोप लगाने के लिए करती है, जिसमें गैर-भाजपा सरकारों को गिराने या चुनावों में फायदा लेने के लिए विधायकों को तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाया जाता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस मामले में शामिल एक व्यक्ति पहले लोकसभा चुनाव लड़ चुका है और हार गया था।
ओडिशा में कांग्रेस विधायक दल के उपनेता अशोक कुमार दास ने बिदादी थाना प्रभारी को दी शिकायत में बताया कि चार लोगों ने विधायकों से संपर्क कर उन्हें राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के लिए करोड़ों रुपये का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा कि विधायकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें बेंगलुरु लाया गया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा द्वारा एक अतिरिक्त उम्मीदवार उतारे जाने के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है, जिससे विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं।