
हिंदू धर्म में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने का विधान है। पितृपक्ष का समापन आश्विन मास की अमावस्या तिथि को होता है। आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या, विसर्जनी, महालया या पितृमोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है।
इस दिन पितरों की विदाई की जाती है। खास बात ये है कि जिनको अपने पितरों की तिथि याद नहीं हो, उनके निमित्त भी श्राद्ध, तर्पण, दान आदि पितृपक्ष की अमावस्या को किया जाता है। इसलिए इसे सर्व पितृ अमावस्या कहते हैं। तो आइए जानते हैं सर्व पितृ अमावस्या का महत्व और मुहूर्त।
कब है सर्व पितृ अमावस्या 2022 ?
हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आश्विन मास की अमावस्या तिथि तक होता है। इन 15-16 दिनों में परिजन अपने पितरों के नाम पर उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध कर्म करते हैं। पितृपक्ष के अंतिम दिन आश्विन अमावस्या होती है। इस साल सर्व पितृ अमावस्या 25 सितंबर को है।
आश्विन अमावस्या या महालया अमावस्या का महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों में पितृ पक्ष के आखिरी दिन को आश्विन अमावस्या कहा जाता हैं। इसे महालया अमावस्या और सर्व पितृ अमावस्या भी कहते हैं। महालया अमावस्या पर लोग पवित्र नदी में स्नान करके अपने पूर्वजों का तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर उनकी विदाई करते हैं। वे लोग जो अपने पितरों की मृत्यु तिथि भूल गए हों। वे इस दिन अपने पितरों के नाम पर श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। मान्यता है कि महालया अमावस्या पर श्राद्ध करने से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होती है और जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।
अमावस्या 2022, शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : 25 सितंबर को प्रातः 4:35 से शुरू होकर 5:23 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : 25 सितंबर को प्रातः सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
गोधुली मुहूर्त: 25 सितंबर को सायं 06:02 बजे से सायं 6:26 बजे तक
विजय मुहूर्त : 25 सितंबर को दोपहर 2:13 बजे से 3:01 बजे तक
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पूरा दिन कर सकेंगे तर्पण और पिंडदान
सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्ता पूरे दिन किसी भी समय पिंडदन कर सकते हैं। रविवार के दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के कारण सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सभी नक्षत्रों में श्रेष्ठ माना गया है। साथ ही इस दिन बुधादित्य योग और त्रिकोण योग का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग का आरंभ सुबह 6:20 से हो रहा है जो अगले दिन सुबह 5:56 तक रहेगा। इसलिए पूरे दिन तर्पण पिंडदान इत्यादि श्राद्ध क्रियाएं की जा सकेंगी। मान्यताओं के अनुसार इस योग में पिंडदान का अधिक लाभ मिलता है और पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
सर्व पितृ अमावस्या पर कैसे दें पितरों को विदाई
सर्व पितृ अमावस्या या विसर्जन के दिन सबसे पहले स्नान करके सफेद वस्त्र पहनकर पितरों के नाम तर्पण करना चाहिए। इस दिन दक्षिण की तरफ मुंह करके बैठे और तांबे के लौटे में गंगा जल भरें। उसमें काले तिल, कच्चा दूध और कुस डालकर तर्पण करें। तर्पण करते समय इस मंत्र का जाप जरूर करें- ऊं पितृ गणाय: विधमहे जगधारणीय धी महे तनो पितरों प्रचो दयात। इसके बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। इस दिन ब्राह्मण भोजन जरूर कराएं। भोजन में खीर जरूर बनाएं या पितरों को जो भी भोजन पसंद हो तो वो बनाए। ब्राह्मण के लिए बनाए हुए भोजन में से पांच हिस्से देवताओं, गाय, कुत्ता, चीटी और कौवे के लिए निकालें। इसके बाद ब्राह्मणों को वस्त्र दान करें और आशीर्वाद लें।
(नोट: यहां दी गई सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। हम मान्यता और जानकारी की पुष्टि नहीं करते हैं।)
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