
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोरोना वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि याचिका का मकसद सिर्फ सनसनी फैलाना था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि अगर आपने वैक्सीन नहीं ली होती तो इसके क्या साइड इफेक्ट होंगे। बेंच ने याचिकाकर्ताओं को क्लास एक्शन सूट दायर करने की सलाह भी दी।
याचिका में ब्लड कोटिंग का था दावा
बता दें, यह याचिका प्रिया मिश्रा और अन्य याचिकाकर्ताओं ने दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि कोरोना वैक्सीन के कारण ब्लड क्लॉटिंग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। बेंच ने कहा, “हम इस तरह के मुद्दों को बढ़ावा नहीं देना चाहते। यह याचिका सिर्फ जनता में भ्रम और डर पैदा करने के लिए दायर की गई थी।”
बीते सात महीनों में कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सिन के साइड-इफेक्ट्स को लेकर कुछ विवादित दावे सामने आए हैं…
कोविशील्ड से TTS का खतरा
29 अप्रैल 2024 को ब्रिटेन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में माना था कि उनकी वैक्सीन से थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) का खतरा है। हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा कि ऐसे मामले बेहद दुर्लभ होते हैं। भारत में यही वैक्सीन सीरम इंस्टीट्यूट ने कोविशील्ड के नाम से बनाई थी।
कोवैक्सिन से गुलियर बेरी सिंड्रोम का खतरा
16 मई 2024 को एक रिसर्च में कोवैक्सिन से गुलियन बेरी सिंड्रोम (GBS), ब्लड क्लॉटिंग और मासिक धर्म संबंधी अनियमितताओं का खतरा बताया गया। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में की गई इस स्टडी के अनुसार, वैक्सीन का असर टीनएजर्स और एलर्जी से जूझ रहे लोगों पर ज्यादा देखा गया। इसके साथ ही आंखों से जुड़ी समस्याएं और हाइपोथायरायडिज्म भी देखा गया।
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