
राजीव सोनी-भोपाल। लोकसभा चुनाव में भाजपा पहली बार क्लीन स्वीप करते हुए प्रदेश की सभी 29 सीटों पर कमल खिलाने में सफल हो गई। लेकिन इनमें से 8 सीटें ऐसी भी रहीं जहां भाजपा आशंकित थी वहीं कांग्रेस उम्मीद से भरी थी। लेकिन छिंदवाड़ा और मंडला में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और दोनों सीट के प्रभारी नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की लगातार मॉनिटरिंग बनी रही। विजयवर्गीय ने दोनों सीट पर कैंप भी किया और कांग्रेस की कमजोर कड़ियों को तोड़ लिया।
आरएसएस के स्थानीय वालंटियर्स मुरैना, ग्वालियर, भिंड, सतना, राजगढ़ और रतलाम में अंतिम क्षणों तक अपने वोटर्स को निकालने में डटे रहे। संघ ने 6 सीटों पर ही एक लाख स्वयंसेवकों को तैनात किया था। भाजपा ने छिंदवाड़ा में जीत का परचम फहराने 2014-19 में भी ताकत झोंकी थी लेकिन सफलता अब मिल पाई। कांग्रेस-भाजपा के कब्जे वाली 7 विधानसभा सीटों पर बढ़त लेकर सबको चौंका दिया।
अपनी विस सीटों पर हारी भाजपा
कांग्रेस 21 विस सीटों पर आगे रही। इनमें 7 भाजपा के कब्जे वाली हैं। पानसेमल (खरगोन) 5,290, सबलगढ़ (मुरैना) 13 हजार, भितरवार (ग्वालियर) 5,898, सेवढ़ा (भिंड) 4,908, बुरहानपुर (खंडवा) 7,209, सिंहावल (सीधी) 3,943, शहपुरा में 5,624 वोटों से भाजपा पिछड़ गई।
सिमट गया जीत का अंतर
चार सीटों पर कांग्रेस की कड़ी टक्कर के कारण भाजपा प्रत्याशियों की जीत का अंतर एक लाख से नीचे सिमट गया। इनमें मुरैना 52 हजार, भिंड 64, ग्वालियर 67 और सतना में भाजपा को करीब 84 हजार मतों की बढ़त मिल पाई। राजगढ़ सीट पर लीड आधी रह गई।
6 विधायकों में केवल शिवराज ही बने सांसद
भाजपा और कांग्रेस ने अपने जिन 6 विधायकों को चुनाव मैदान में उतारा था उनमें केवल एक विधायक पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ही सफलता मिल पाई। कांग्रेस के 5 विधायकों को अपनी विस सीट सहित संसदीय क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। इनमें भिंड से फूल सिंह बरैया, सिद्धार्थ कुशवाह सतना, फुंदेलाल मार्को शहडोल, ओमकार सिंह मरकाम मंडला और महेश परमार को उज्जैन सीट पर हार का सामना करना पड़ा। संघ ने अपने प्रांत स्तर के पदाधिकारियों को सभी 29 सीटों पर समन्वयक के बतौर तैनात किया था।
प्रदेश की हर सीट पर तैयारी का रोज करते थे आकलन
हमने मप्र को अलग-अलग क्लस्टर में बांटा था। हर सीट का रोज आकलन किया। जहां भी हमें हस्तक्षेप व संगठन कौशल की जरूरत पड़ी हमने किया। यह हमारे चुनावी कौशल और बूथ प्रबंधन की जीत है। -डॉ हितेष वाजपेयी प्रवक्ता मप्र भाजपा
कार्यकर्ताओं को तोड़ा, सत्ता का दुरुपयोग किया
कार्यकर्ताओं को तोड़ा, सत्ता का दुरुपयोग किया छिंदवाड़ा को पूरे देश की भाजपा ने घेरा, हमारे कांग्रेस परिवार को डर, दबाव और सत्ता का दुरुपयोग कर तोड़ा और इस चुनाव को जीतने के लिए सारे हथकंडे अपनाए। -नकुलनाथ, प्रत्याशी छिंदवाड़ा
टिकट देरी से मिलने पर प्रचार में समय कम मिला
टिकट देरी से मिलने के कारण मुझे प्रचार के लिए समय कम मिला। भाजपा के पास पूरा समय था, लेकिन शिव मंगल सिंह तोमर चुनाव जीतेंगे यह संभावना भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी नहीं थी। -सत्यपाल सिंह सिकरवार, प्रत्याशी मुरैना लोकसभा