PU Special :भोपाल-इंदौर के मेट्रोपॉलिटन रीजन की प्लानिंग अधूरी, समिति गठन का किया जा रहा इंतजार

अशोक गौतम, भोपाल। भोपाल और इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के सुनियोजित विकास के लिए संयुक्त मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया अभी सर्वे और डाटा संग्रहण के चरण में है। करीब 28 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के विकास की रूपरेखा तैयार करने के लिए लगभग 40 विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है। दूसरी ओर, इंदौर महानगर योजना समिति के गठन और उसकी पहली बैठक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में रीजन के छोटे शहरों, कस्बों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रस्तावित नए शहरों के विकास की योजना को अंतिम रूप देने में अभी समय लग सकता है।
अलग-अलग क्लस्टर और जोन तय किए जाएंगे
महानगर क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित होने के बाद अब उपलब्ध संसाधनों, आर्थिक गतिविधियों और भविष्य में विकास की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। उद्योग, व्यापार, कृषि, जल संसाधन, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी के आधार पर अलग-अलग क्लस्टर और जोन तय किए जाएंगे। प्रारंभिक आकलन में प्रमुख सड़कों के आसपास शहरी विस्तार की अधिक संभावना सामने आने की बात कही गई है।
एक साल तक लग सकता है जोन निर्धारण में
मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में जमीन के उपयोग और आर्थिक गतिविधियों के आधार पर जोन निर्धारित करने में करीब एक साल लगने का अनुमान है। प्रस्तावित योजना में तीन प्रमुख सेक्टरों पर ध्यान दिया जाएगा। प्राइमरी सेक्टर में कृषि और हॉर्टिकल्चर आधारित गतिविधियां, सेकेंडरी सेक्टर में उद्योग एवं व्यावसायिक गतिविधियां और टर्शियरी सेक्टर में आईटी, शिक्षा तथा स्किल पार्क जैसी गतिविधियों के लिए क्षेत्र निर्धारित किए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की जरूरत के अनुरूप शहरी विस्तार करना है।
सड़कों और परिवहन नेटवर्क का आकलन
पिछले पांच से दस वर्षों में वाहनों की संख्या बढ़ने से प्रमुख सड़कों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में महानगरों को आसपास के कस्बों और छोटे शहरों से जोड़ने के लिए मौजूदा सड़क नेटवर्क की क्षमता और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जा रहा है। जहां सड़क चौड़ीकरण संभव नहीं होगा, वहां फ्लाईओवर जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इससे औद्योगिक क्षेत्रों और नए विकास केंद्रों तक पहुंच बेहतर बनाने की योजना तैयार होगी।
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कृषि भूमि और जलाशयों के संरक्षण पर जोर
महानगरों के विस्तार के बीच कृषि भूमि, हॉर्टिकल्चर क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट को सुरक्षित रखने की योजना भी प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य ग्रामीण आबादी की कृषि आधारित आजीविका और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना है। जलाशयों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी नियोजन का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि अनियोजित विकास से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
समिति और मास्टर प्लान अहम कड़ी
भोपाल और इंदौर रीजन के लिए सड़क, सीवेज, पेयजल तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की साझा रूपरेखा तैयार की जानी है। महानगर योजना समिति की भूमिका इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगी। जब तक डाटा संग्रहण, जोन निर्धारण और संस्थागत व्यवस्था पूरी नहीं होती, तब तक छोटे शहरों और कस्बों के विकास को महानगरों की जरूरतों के साथ जोड़ने वाली योजना को अंतिम रूप देना चुनौती बना रहेगा।
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