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कृषि विश्वविद्यालय फलों के कचरे से तैयार करेगा बायो एंजाइम, फसल की पैदावार बढ़ाने में होगा सहायक

फल-सब्जी से कचरा एकत्रित होगा, इसे लेकर नगर निगम से किया जाएगा टाइअप

आशीष शर्मा-ग्वालियर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्राकृतिक खेती पर जोर दे रहे हैं, ताकि फसलों में प्राकृतिक खाद का उपयोग हो, जिससे मानव जीवन रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव से बच सके। बायो एंजाइम से मिट्टी के पोषक तत्वों के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है और इससे फसल की पैदावार बढ़ती है। इसे लेकर ही राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विवि के कुलपति प्रो. अरविंद शुक्ला ने फलों के कचरे से बायो एंजाइम (जैविक खाद) तैयार करने की योजना बनाई है।

इसके लिए विवि के कर्मचारी शहर की फल मंडी से फलों का कचरा एकत्रित करेंगे, साथ ही विवि कचरे को लेकर नगर निगम से भी टाइअप करेगा, ताकि शहर से उठने वाले कचरे में से फलों का कचरा अलग से एकत्रित करके विवि को मिल सके। इससे विवि खाद बेचकर इनकम बढ़ाएगा।

बायो एंजाइम के फायदे

मिट्टी के स्वास्थ्य में योगदान देते हैं। रासायनिक इनपुट को कम करते हैं। स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देते हैं। फफूंद के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। फसल की पैदावार बढ़ाते हैं। बायो एंजाइम तैयार करने के लिए फलों के कचरे को टुकड़ों में काटकर प्लास्टिक के कंटेनर में डालकर पानी व गुड़ डाल दिया जाता है। इसे तीन महीने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद बायो एंजाइम तैयार हो जाता है।

बायो एंजाइम फसलों के लिए प्राकृतिक खाद

फलों के कचरे से बायो एंजाइम तैयार करने की प्लानिंग है। इसके लिए फल मंडी से फलों का कचरा उठाया जाएगा, साथ ही कचरे को लेकर नगर निगम से टाइअप किया जाएगा। बायो एंजाइम फसलों के लिए प्राकृतिक खाद है, जिससे मिट्टी को पोषक तत्व मिलते हैं और इससे फसल की पैदावार बढ़ती है। -प्रो. अरविंद शुक्ला, कुलपति कृषि विवि

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