
नई दिल्ली। भारत में हर साल हजारों लोग ट्रांसप्लांट का इंतजार करते हैं, लेकिन डोनर के अभाव में ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता है। इस बीच एक्सपेरिमेंटल एंड क्लीनिकल जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, 2019 में हुए ऑर्गन ट्रांसप्लांट में 80 फीसदी लिविंग डोनर महिलाएं ही थीं। इनसे अंग प्राप्त करने वाले 80 फीसदी पुरुष थे। देश में 1995 से लेकर 2021 तक 36,640 ट्रांसप्लांट हुए थे। इनमें अंग लेने वाले 29,000 पुरुष थे, जबकि केवल 6,945 महिलाओं ने ही ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराया था। अंगदान करने वाले हर 5 व्यक्ति में से 4 महिलाएं हैं। जबकि अंग लेने वालों में हर 5 में से 4 पुरुष हैं। इस आंकड़े से पता चलता है कि अंगदान करने के मामले में महिलाएं पुरुषों से काफी आगे हैं। लिविंग ऑर्गन डोनेशन के मामले में भी महिलाएं आगे हैं।
पुरुषों को किडनी महिला ही करती हैं डोनेट
महिलाएं लिविंग डोनर भी हैं। यानी जिंदा रहते हुए अंगदान करने के मामले में पुरुषों से काफी आगे हैं। लिविंग डोनर अपनी किडनी और लिवर को दान कर सकता है। अधिकतर मामलों में पुरुषों को किडनी महिला ही डोनेट करती हैं।
परिवार की चिंता, महिलाएं इसलिए करती हैं अंगदान
- एक्सपर्ट्स कहते हैं कि महिलाएं सिर्फ अपने पति ही नहीं, बल्कि बच्चे और भाई-बहनों को भी अंगदान करती हैं।
- महिलाओं के अंगदान करने की वजह आर्थिक नुकसान से बचना होता है।
- महिलाओं को लगता है कि अगर अंगदान करेंगे तो पुरुषों को घर पर बैठना पड़ सकता है। ऐसे में आर्थिक नुकसान होने का रिस्क रहता है, इसलिए महिलाएं अंगदान करती हैं।
- अगर परिवार में किसी बच्चे को अंगदान करना है तो उसमें भी महिलाएं ही आगे आती हैं।
26 साल में 36 हजार से ज्यादा ट्रांसप्लांट: देश में 1995 से लेकर 2021 तक 36,640 ट्रांसप्लांट हुए थे। इनमें अंग लेने वाले 29,000 पुरुष थे।
पिछले 15 साल से इस फील्ड में हूं। लेकिन आजतक केवल मैंने एक ही केस देखा है, जिसमें पुरुष ने महिला को अंगदान किया है। बाकी मामलों में अंगदान करने वाली महिलाएं ही हैं। महिलाएं घर की जिम्मेदारी और आर्थिक नुकसान से परिवार को बचाने के लिए ऐसा करती हैं। – मयूरी बार्वे, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर, डीवाई मेडिकल कॉलेज, पुणे