
भोपाल। लगभग एक साल पहले प्रदेश में प्रारंभ हुआ एडॉप्ट एन आंगनबाड़ी अभियान अब लगभग ठप है। शुरुआती दौर में सभी 98 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेने का दावा किया गया था परन्तु इसमें एक भी विधायक का नाम नहीं जुड़ा था। जिन आधा दर्जन मंत्रियों ने सहयोग राशि दी थी, उनके द्वारा भी फॉलोअप नहीं नहीं लिया जा रहा है। विभाग के अधिकारी सफाई दे रहे हैं कि लाड़ली बहना योजना के कारण दूसरे अभियानों के तरफ ध्यान नहीं दे पा रहे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले साल 24 मई को भोपाल में जन समुदाय से खिलौने जोड़कर आंगनबाड़ी केंद्रों के कायाकल्प करने का अभियान प्रारंभ किया था। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष सहित दो मंत्री, चार सांसद सहित 17 हजार जनप्रतिनिधियों ने केंद्र गोद लिए थे। 26 हजार से अधिक कर्मचारी और अधिकारी भी आगे आए थे। 1 लाख 9 हजार से अधिक लोगों के माध्यम से कुल 26 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई गई थी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने की थी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने अभियान प्रारंभ होने के कुछ दिनों बाद अभियान की समीक्षा की थी। विभाग ने बताया था कि सहयोग करने वालों में सबसे आगे नादर्न कोलफील्ड लिमिटेड है जिसने 3.5 करोड़ में 25 आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण कराने का भरोसा दिया है। इसके बाद एनपीआईसीएल जबलपुर ने- 35.70 लाख की सहायता की।
फिलहाल लाड़ली बहना योजना पर ही फोकस
टीकमगढ़ जिले की एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि पिछले आठ माह से अधिक समय हो गए, एक भी विधायक, न जन प्रतिनिधि ने आंगनबाड़ी की तरफ नहीं देखा। अब तो न कोई खिलौने दे रहा और न ही अन्य कोई जन सहयोग मिल रहा। हालांकि सरकार के साथ ही प्रशासिक अधिकारियों का फोकस फिलहाल लाड़ली बहना योजना पर है।
यह काम होना था
- अधोसंरचना मूलक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहयोग
- बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति
- स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं में सहयोग
- निगरानी हेतु पोर्टल एवं मोबाइल ऐप
अभियान को गति देने जल्द समीक्षा करेंगे
आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेने का अभियान बंद नहीं हुआ है। जल्द ही समीक्षा करते हुए गोद लेने वाले लोगों से आगे सहयोग करने की बात कही जाएगी। अभियान में सभी 98 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लिया गया था। -डॉ.आरआर भोसले, आयुक्त, महिला एवं बाल विकास विभाग
(इनपुट-पुष्पेंद्र सिंह)