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Siyaram Baba : भक्तों से लेते मात्र 10 रुपए का दान, 109 साल की उम्र में बिना चश्मे के 21 घंटे करते हैं रामायण पाठ, जानिए कौन हैं संत सियाराम बाबा

Siyaram Baba : मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित भट्याण आश्रम के संत सियाराम बाबा आध्यात्मिकता, तपस्या और समाजसेवा के प्रतीक माने जाते हैं। 100 साल से अधिक की उम्र पार कर चुके सियाराम बाबा की तपस्या और उनकी जीवनशैली ने उन्हें देशभर में प्रसिद्ध बना दिया है। हाल ही में स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण बाबा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अब वे आश्रम लौट आए हैं। उनके अनुयायी उनकी चमत्कारी शक्तियों और सरल जीवनशैली के कायल हैं।

आश्रम में बाबा इलाज जारी

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर बाबा सियाराम की मौत की खबर भी सामने आई थी, लेकिन वह झूठी अफवाह थी। इसी बीच सियाराम बाबा की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उन्हें आश्रम लाया गया। नर्मदा किनारे भट्यान आश्रम में बाबा इलाज जारी है। डॉक्टर्स की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर निगरानी रखे हुए हैं। बाबा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त आश्रम पहुंच रहे हैं।

संत सियाराम बाबा की हालत में सुधार, आश्रम में चल रहा इलाज।

10 साल पैर पर तपस्या और 12 साल मौन व्रत

निमाड़ के प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा रामभक्ति में लीन एक ऐसे संत हैं, जो रोजाना 21 घंटे तक बिना रुके रामायण का पाठ करते हैं। उनकी दिव्य दृष्टि का प्रमाण यह है कि 100 साल से भी ज्यादा उम्र के बावजूद वे बिना चश्मे के रामायण पढ़ते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी अपना सारा काम स्वयं करते हैं। उनके भक्तों का कहना है कि बाबा ने 10 वर्षों तक एक पैर पर खड़े होकर तपस्या की और 12 साल तक मौन व्रत का पालन किया।

संत सियाराम बाबा अपना काम स्वयं करते हैं।

वास्तविक उम्र एक रहस्यमयी तथ्य

सियाराम बाबा मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के नर्मदा नदी के घाट पर स्थित भट्याण आश्रम के संत हैं और यहीं रहते हैं। बाबा की उम्र को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वे 109 या 110 साल के हैं, जबकि कुछ का कहना है कि उनकी उम्र 130 साल के करीब है। हालांकि, बाबा ने भी खुद कभी अपनी उम्र के बारे में कोई खुलासा नहीं किया।

संत सियाराम बाबा 21 घंटे तक बिना रुके रामायण का पाठ करते हैं।

कौन हैं बाबा सियाराम?

संत सियाराम बाबा भगवान हनुमान के परम भक्त हैं। बाबा का जन्म महाराष्ट्र के किसी जिले में होना बताया जाता है। शुरुआती पढ़ाई के दौरान ही वे किसी संत के संपर्क में आए, जिसके बाद उनके मन में वैराग्य का विचार जागा। बाबा ने 7वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी और घर-परिवार त्यागकर तपस्या के लिए हिमालय चले गए। हिमालय में तपस्या के बाद बाबा ने नर्मदा तट पर स्थित भट्याण आश्रम को अपना स्थाई ठिकाना बनाया। हालांकि, उनके बाद का जीवन काफी रहस्यमयी है, जिसकी जानकारी शायद ही किसी के पास जानकारी हो।

बाबा दान में लेते केवल 10 रुपए

सियाराम बाबा का सिद्धांत है कि सेवा ही सच्चा धर्म है। उनके अनुयायी बताते हैं कि बाबा दान में केवल 10 रुपए ही स्वीकार करते हैं। कोई लाखों रुपए दान करने की कोशिश करें, तो भी बाबा केवल 10 रुपए लेकर बाकी लौटा देते हैं। इसके अलावा, बाबा ने नर्मदा नदी के तट पर कई धर्मशालाएं और मंदिर बनवाए हैं। नर्मदा के संरक्षण के लिए भी वे करोड़ों रुपए दान कर चुके हैं।

बाबा का चमत्कारी जीवन और अद्भुत किस्से

  • कभी खत्म न होने वाली चाय की केतली : भक्तों का कहना है कि बाबा की केतली में कभी चाय खत्म नहीं होती। जब भी भक्त उनके पास चाय के लिए आते हैं, बाबा की केतली से सबके लिए पर्याप्त चाय निकलती है।
  • केवल लंगोट में जीवनयापन : कड़ाके की ठंड हो या भीषण गर्मी, बाबा केवल लंगोट धारण करते हैं। उनके अनुयायी कहते हैं कि तप और ध्यान के बल पर उन्होंने अपने शरीर को हर मौसम के अनुकूल बना लिया है। बाबा करीब 12 साल तक मौन व्रत में रहे।
  • रामायण का 21 घंटे तक पाठ : बाबा प्रतिदिन 21 घंटे रामायण की चौपाइयां पढ़ते हैं। इतनी उम्र में भी वे बिना चश्मे के पढ़ने में सक्षम हैं, जो अपने आप में एक चमत्कार जैसा है।

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