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Uttarkashi Tunnel Rescue Update : उत्तरकाशी में 11 दिन से फंसे 41 मजदूर… ऑगर मशीन से ड्रिलिंग, 6 इंच के पाइप से भेजा जा रहा खाना

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Uttarkashi Tunnel Rescue Update : उत्तरकाशी में 11 दिन से फंसे 41 मजदूर… ऑगर मशीन से ड्रिलिंग, 6 इंच के पाइप से भेजा जा रहा खाना
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को आज 11 दिन हो गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत ऑगर मशीन से ड्रिलिंग की जा रही है। अब तक ऑगर मशीन से 32 मीटर ड्रिलिंग करके 800 एमएम का पाइप टनल में डाला जा चुका है। वहीं अंदर फंसे मजदूरों तक खाना और पानी पहुंचाने के लिए छह इंच के पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे सुरंग में छेद कर फिट किया गया है।

32 मीटर तक डाले जा चुके पाइप

सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए ऑगर मशीन अब तक 32 मीटर तक ड्रिल कर चुकी है। इसमें 800 एमएम व्यास के पाइप डाले गए हैं। जानकारी के मुताबिक, कुल 60 मीटर तक ड्रिल कर पाइप डाले जाएंगे। वहीं रेस्क्यू टीमों ने 40 एंबुलेंस बुलाई हैं, आपातकालीन सेवा 108 को अलर्ट पर रखा गया है। अगर रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई दिकत नहीं आई तो जल्द ही मजदूरों को निकाला जा सकेगा।

पाइप के जरिए हर घंटे भेजा जा रहा खाना

बताया जा रहा है कि, मजदूरों के लिए भेजा जा रहा खाना डॉक्टर की निगरानी में बन रहा है। कम तेल और मसालों के साथ इसे तैयार किया जा रहा है, ताकि यह आसानी से पच सके। मजदूरों रात में खाने के 150 पैकेट भेजे गए, जबकि दिन में फल भेजे गए थे। मजदूरों को हर एक घंटे में खाना दिया जा रहा है। बोतल में भरकर मजदूरों तक खाना पहुंचाया जा रहा है।

मजदूरों के पास मूव करने के लिए कितनी जगह है ?

जानकारी के मुताबिक, मजदूर सिलक्यारा छोर से अंदर गए थे, जहां से 2340 मीटर की सुरंग बन चुकी है। इसी हिस्से में 200 मीटर की दूरी पर मलबा गिरा है, जो (मलबा) करीब 60 मीटर लंबाई में है। इसका मतलब है कि, मजदूर 260 मीटर दूर फंसे हैं। हालांकि, मजदूरों के पास मूव करने के लिए दो किलोमीटर का इलाका है और 50 फीट चौड़ी रोड है।

टनल में फंसे हैं 8 राज्यों के 41 मजदूर

उत्तरकाशी में सिलक्यारा टनल में 8 राज्यों के 41 मजदूर फंसे हैं। इसमें उत्तराखंड के 2, हिमाचल प्रदेश का 1, यूपी के 8, बिहार के 5, पश्चिम बंगाल के 3, असम के 2, झारखंड के 15 और ओडिशा के 5 मजदूर शामिल हैं।

कैसे हुआ हादसा

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 12 नवंबर की सुबह 4 बजे एक निर्माणाधीन टनल धंस गई थी। NDRF के असिस्टेंट कमांडर करमवीर सिंह के मुताबिक, साढ़े 4 किलोमीटर लंबी और 14 मीटर चौड़ी इस टनल के स्टार्टिंग पॉइंट से 200 मीटर तक प्लास्टर किया गया था। उससे आगे कोई प्लास्टर नहीं था, जिसकी वजह से हादसा हो गया। चारधाम प्रोजेक्ट के तहत यह टनल ​​​​ब्रह्मखाल और यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर सिल्क्यारा और डंडलगांव के बीच बनाई जा रही है। नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL), NDRF, SDRF, ITBP, BRO और नेशनल हाईवे की 200 से ज्यादा लोगों की टीम कई घंटों से रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई है।

घटना की जांच के लिए कमेटी गठित

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर हाईलेबल मीटिंग की। धामी ने बताया- हम रेस्क्यू ऑपरेशन की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्रालय की ओर से भी घटना की मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके अलावा घटना की जांच के लिए उत्तराखंड सरकार ने छह सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी ने आज जांच शुरू भी कर दी है। ये भी पढ़ें- उत्तराखंड : उत्तरकाशी टनल में फंसे मजदूरों का पहला वीडियो आया सामने, 10वें दिन सुरंग में पहुंचा एंडोस्कोपिक कैमरा; सभी 41 लोग सुरक्षित
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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