तिब्बत में फिर भूकंप से हिली धरती! 4.6 तीव्रता का सबसे तेज झटका, चीन तक असर

नई दिल्ली। तिब्बत में एक बार फिर धरती कांपने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। शनिवार सुबह कुछ घंटों के दौरान यहां भूकंप के तीन झटके दर्ज किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक, इनकी तीव्रता 4.0, 4.6 और 4.5 रही। सबसे तेज झटका रात 2 बजकर 7 मिनट पर आया, जिसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब गुरुवार को आए शक्तिशाली भूकंप से इलाके में भारी नुकसान की खबर सामने आई थी। चीन में भी भूकंप दर्ज किया गया।
कुछ घंटों में तीन बार कांपी धरती
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, तिब्बत में पहला झटका रात 1 बजकर 8 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता 4.0 थी। इसकी गहराई 15 किलोमीटर दर्ज की गई। इसके बाद रात 2 बजकर 7 मिनट पर 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। तीसरा झटका सुबह 5 बजकर 38 मिनट पर दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 4.5 रही। इसकी गहराई भी 10 किलोमीटर थी।
पिछले भूकंप में गई थी 16 लोगों की जान
तिब्बत में गुरुवार, 22 अक्टूबर को आए 7.0 तीव्रता के भूकंप ने भारी नुकसान पहुंचाया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस घटना में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, नागचू शहर में कई मकान और पशुओं को रखने के बाड़े ढह गए थे। राहत और बचाव कार्य के लिए बड़ी संख्या में कर्मियों को तैनात किया गया। प्रभावित लोगों तक तंबू, बिस्तर, गर्म कपड़े और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाई गईं।
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चीन में भी दर्ज हुआ भूकंप
तिब्बत में झटकों के बीच चीन में भी शनिवार सुबह 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके केंद्र की गहराई 10 किलोमीटर बताई गई। हालांकि, इस भूकंप से हुए संभावित नुकसान को लेकर तत्काल विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं थी। भूकंप के बाद नुकसान का आकलन करने में समय लग सकता है।
क्यों आते हैं भूकंप के झटके?
पृथ्वी की बाहरी परत कई टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें लगातार धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। जब इनके बीच दबाव बढ़ता है, तो चट्टानों में जमा ऊर्जा अचानक बाहर निकल सकती है। इससे भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं और धरती हिलने लगती है। तिब्बत हिमालय के आसपास स्थित है, जहां भूगर्भीय हलचल के कारण भूकंप का खतरा बना रहता है।
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भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?
भूकंप की तीव्रता और उससे निकलने वाली ऊर्जा का आकलन वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से किया जाता है। समाचारों में आमतौर पर भूकंप का परिमाण बताया जाता है, जिसे बोलचाल में अक्सर रिक्टर स्केल की तीव्रता कहा जाता है। भूकंप से होने वाला नुकसान उसकी तीव्रता के साथ-साथ गहराई, केंद्र से दूरी, इमारतों की मजबूती और जमीन की प्रकृति पर भी निर्भर करता है।




















