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लाहौर बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, AQI 410 पार, दिल्ली में भी बढ़ा प्रदूषण

पाकिस्तान के लाहौर में AQI 410 दर्ज, PM2.5 लेवल WHO गाइडलाइन से 45.2 गुना ज्यादा, दिल्ली का औसत AQI 225, 38 केंद्रों पर हवा खराब, IQAir ने 300 से ऊपर AQI को खतरनाक बताया, अक्टूबर 2024 में लाहौर का AQI 1900 तक पहुंचा था।
लाहौर बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, AQI 410 पार, दिल्ली में भी बढ़ा प्रदूषण
लाहौर की फोर्ट रोड फूड स्ट्रीट पर स्थित एक फूड स्टॉल से धुएं का गुबार। फाइल फोटो

लाहौर। पाकिस्तान का लाहौर शुक्रवार को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा। एक एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार, शहर की हवा खतरनाक लेवल पर पहुंच गई और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 410 दर्ज किया गया। AQI एयर पॉल्यूशन मापने का न्यूमेरिकल पैमाना है। इसका स्तर जितना ज्यादा होता है, हवा की क्वालिटी उतनी ही खराब होती है और हेल्थ रिस्क बढ़ जाते हैं। स्विट्जरलैंड के मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म IQAir के स्केल के अनुसार, 300 से अधिक AQI को 'खतरनाक' कैटेगरी में रखा जाता है।

दिल्ली में औसत AQI 225 पर रहा

ठंड की आहट के साथ दिल्ली में प्रदूषण का असर बढ़ने लगा है। शुक्रवार सुबह शहर के कई हिस्सों में धुंध की हल्की चादर देखी गई। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के 'समीर' ऐप के डेटा के अनुसार, सुबह 9 बजे दिल्ली का एवरेज AQI 225 रहा। शहर के 38 मॉनिटरिंग सेंटर्स पर एयर क्वालिटी 'खराब', जबकि 18 सेंटर्स पर 'मध्यम' कैटेगरी में दर्ज की गई।

लाहौर में सामान्य से 45 गुना ज्यादा PM2.5

IQAir की रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर में PM2.5 पॉल्यूटेंट्स की सांद्रता वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के एनुअल गाइडलाइन वैल्यू से 45.2 गुना अधिक थी। PM2.5 का मतलब 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम डायमीटर वाले बारीक कणों से है। ये कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश कर सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं। पंजाब प्रांत की सरकार के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर और अन्य हिस्सों में हर साल अक्टूबर से फरवरी के बीच स्मॉग की समस्या रहती है। हाल के वर्षों में एयर पॉल्यूशन का बढ़ता लेवल इस प्रांत में पब्लिक हेल्थ और एनवायरनमेंट के लिए बड़ी चिंता बनकर उभरा है।

सारे रिकॉर्ड तोड़ चुका है यहां का प्रदूषण

स्विट्जरलैंड की संस्था IQAir, जो 14 रीजनल मॉनिटरिंग सेंटर्स से डेटा इकट्ठा करती है, ने साल 2025 में लाहौर को पांचवां सबसे प्रदूषित शहर माना है। pulitzercenter-org के मुताबिक साल 2017 से लाहौर में PM2.5 का एवरेज लेवल WHO की सेफ लिमिट से लगातार काफी ऊपर रहा है। पिछली शरद ऋतु (अक्टूबर) में लाहौर में रोजाना के आंकड़े अक्सर 1,900 तक पहुंच जाते थे।

हर सर्दी के मौसम में प्रदूषण की समस्या

ठंडी हवा प्रदूषक तत्वों जैसे वाहनों से निकलने वाला धुआं, धूल और खेतों में धान की फसल के अवशेषों को जलाने से पैदा होने वाला धुआं को जकड़ लेती है। लाहौर के अधिकारियों ने पहले भी प्रदूषण के लिए खराब गुणवत्ता वाले वाहन ईंधन और निर्माण व औद्योगिक गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है।

  • वाहनों से होने वाला उत्सर्जन लाहौर में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्थानीय स्रोत यातायात है। कुल उत्सर्जन में इसका हिस्सा लगभग 83% है।
  • इस इलाके में बिना नियम-कानून के चल रही फैक्ट्रियां, पावर प्लांट और कोयला या लकड़ी जलाने वाले ईंट-भट्ठे मौजूद हैं।
  • फसलों के अवशेष (पराली) जलाने से इलाके में हवा में मौजूद बारीक कणों (पार्टिकुलेट मैटर) की मात्रा काफी बढ़ जाती है।
  • निर्माण कार्य की धूल और कचरा जलाना भी हवा को प्रदूषित करता है।

यह बीमारियां देता है प्रदूषण

  • कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में प्रकाशित एक अध्ययन में वायु प्रदूषण के संपर्क को इस्केमिक हृदय रोग से असमय मृत्यु से जोड़ा गया है। यह हृदय में रक्त की आपूर्ति में कमी है ।
  • कैंसर पर अनुसंधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी ने कण प्रदूषण को कैंसरजनक के रूप में वर्गीकृत किया है।
  • वायु प्रदूषण अस्थमा के दौरे का एक प्रमुख कारण है। 2019 में दुनिया भर में लगभग 262 मिलियन (26.2 करोड़) लोग अस्थमा से प्रभावित हुए और अनुमानित 4,55,000 मौतें हुईं। 
  • वायु प्रदूषण क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) का एक प्रमुख कारण है। इस बीमारी के दो सबसे आम रूप एम्फीसेमा और ब्रोंकाइटिस हैं।
Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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