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न उद्योग थे, न रोजगार, अब अयोध्या धाम का होगा चौतरफा विकास

गृहनगर से लौटे अफसर ने साझा किए अनुभव

नरेश भगोरिया, भोपाल। अयोध्या में रामलला के भव्य-दिव्य मंदिर निर्माण के बाद इस धार्मिक नगरी की कायापलट हो गई है। आज हर कोई अयोध्या की चमकती तस्वीरों से वाकिफ है। मीडिया से सोशल मीडिया का ऐसा कोई प्लेटफॉर्म नहीं है, जहां अयोध्या और रामलला नजर नहीं आएं, लेकिन आज हम जिस अयोध्या को देख रहे हैं, उसकी ऐसी परिकल्पना लगभग 40 साल पहले करना मुमकिन नहीं लगता था। तब की अयोध्या और आज के अयोध्या धाम को करीब से देखा है आयुष विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी संजय कुमार मिश्र ने। वे फैजाबाद के मूल निवासी हैं। राम जन्मभूमि और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी विशेष आस्था बचपन से रही है। वे प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन ही रामलला के दर्शन करने सपरिवार अयोध्या गए थे। पीपुल्स समाचार ने अयोध्या में हुए बदलाव को लेकर उनसे बातचीत की।

सवाल : जब आप अयोध्या में थे तब दर्शन कैसे होते थे ?

जवाब : मैं 1980 मेें गांव से फैजाबाद पढ़ने आया था। राम जन्मभूमि जाते थे तो पता चला था कि मंदिर निर्माण के लिए 1950 से अखंड रामायण चल रही है। प्रभु श्रीराम के दर्शन दूर से चैनल गेट के बाहर से ही संभव थे। अंदर जा नहीं सकते थे। तब हम कनक महल, दशरथ महल, सीता रसोई, तुलसी उद्यान देखने भी जाते थे।

सवाल : रहवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य आदि सुविधाएं कैसी थीं?

जवाब : हम जब जीआईसी कॉलेज में पढ़ते थे तब अयोध्या बहुत छोटा नगर था। सामान्य सुविधाएं तो थीं, लेकिन उद्योग, रोजगार के साधन नहीं थे। उप्र का यह भाग ही पिछड़ा हुआ था। सड़कों की दशा खराब थी। लखनऊ से पहुंचने में 8-9 घंटे लग जाते थे।

सवाल : अब रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के बाद क्या परिवर्तन महसूस करते हैं?

जवाब : अयोध्या धाम ही नहीं उत्तर प्रदेश की इकोनॉमी भी इससे प्रभावित होगी। साल में सबसे ज्यादा 5 करोड़ लोगों के पहुंचने वाले तीर्थ स्थल में अयोध्या का नाम होगा। अनुमान लगाया जा सकता है कि हर छोटे से व्यवसायी से कारोबारी के व्यवसाय कितने गुना बढ़ेगा। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। अयोध्या ही नहीं सरयू नदी के दूसरे तट पर बसे बस्ती जिले का भी कायाकल्प होगा। उप्र सरकार का राजस्व कई गुना बढ़ेगा। हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, सड़कें सब सुविधाएं हैं। बाहर से लोग वहीं बसने की इच्छा लिए भी पहुंच रहे हैं।

सवाल : राम जन्मभूमि के लिए लंबा संघर्ष चला तब स्थानीय लोगों की क्या स्थिति रहती थी?

जवाब : आमतौर पर अयोध्या में मैंने कभी किसी भी समुदाय के स्थानीय रहवासियों के बीच विवाद की स्थिति नहीं देखी। सामान्यत: अयोध्या के हिंदू और मुस्लिम मिलकर ही रहते आए हैं।

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