
विजय एस. गौर-भोपाल। सुप्रीम कोर्ट का स्टे बताकर प्रदेश के समस्त सरकारी विभागों में 2016 से प्रमोशन ठप हैं, लेकिन किसी भी सरकारी विभाग में आज तक प्रमोशन रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के स्टे का हवाला देकर (डिपार्टमेंट प्रमोशन कमेटी) डीपीसी पर रोक लगाने के आदेश जारी नहीं हुए हैं। दूसरी ओर, हाईकोर्ट जबलपुर और ग्वालियर खंडपीठ ने कई मामलों में साफ कर दिया है कि प्रमोशन पर किसी भी तरह की रोक नहीं है ।
इसके बाद शिक्षा विभाग और पशुपालन विभाग में प्रमोशन किए भी गए हैं। बिना प्रमोशन के 2016 से आज तक करीब 1 लाख 20 हजार अधिकारी कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं। वहीं बचे हुए 5 लाख 85 हजार प्रमोशन से वंचित हैं। प्रमोशन मिल जाता है तो खाली होने वाले पदों के विपरीत करीब डेढ़ लाख अधिकारी कर्मचारियों की भर्ती हो गई होती।
यहां से हुई शुरुआत
दरअसल 2016 में जबलपुर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पदोन्नति नियम-2002 को निरस्त कर दिया था, जिसके प्रभाव में पदोन्नति में आरक्षण पाने वाले एससी/एसटी कर्मचारियों अधिकारियों का डिमोशन होकर रिकवरी होना थी। शिवराज सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ अपील पेश की, यहां हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे हो गया। इसके बाद राज्य के विधि विभाग से अभिमत लिया गया और सभी विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया रोक दी गई। इस बारे में किसी भी विभाग को आदेश जारी नहीं हुए।
ऐसे हुआ खुलासा
30 जुलाई 2024 को ग्वालियर निवासी राकेश सिंह की आरटीआई पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जवाब दिया है कि पदोन्नति पर रोक लगाने संबंधी कोई भी आदेश संचालनालय से जारी नहीं किया गया। सपाक्स के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. केदार सिंह तोमर और अजय जैन के अनुसार करीब 70 बार ज्ञापन दिया गया पर आदेश बताया नहीं गया। कर्मचारी की बात: मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के सचिव उमाशंकर तिवारी ने पशुपालन विभाग की तर्ज पर पदोन्नति की मांग की है।
हाईकोर्ट में सरकार रही नाकाम
शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका पेश की, जिस पर सरकार के सुप्रीम कोर्ट के स्टे के कारण प्रमोशन रोकने के आदेश को हाईकोर्ट ने नकार हुए प्रमोशन के आदेश दिए। अभी तक तीन कर्मचारियों को पदोन्नति मिल चुकी है। इसी तरह पशुपालन विभाग के पशुचिकित्सकों की याचिका पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने प्रमोशन देने के आदेश दिए हैं।
मामला 2016 का, देखते हैं
प्रमोशन पर रोक लगाने संबंधी आदेश जिलों को क्यों नही गया, इसके बारे में दिखवाते हैं। चूंकि मैटर 2016 का है तो अद्यतन स्थिति के बारे में दिखवाना पडेगा। -रुचिवर्धन मिश्रा, आईजी, प्रशासन
विरोध में चलेगा अभियान
सुप्रीम कोर्ट के स्टे की मनमानी व्याख्या करके बिना किसी लिखित आदेश के प्रमोशन रोके गए हैं। इसके विरोध में जहां-जहां भी चुनाव होंगे, वहां अभियान चलाएंगे। -डॉ. केदार सिंह तोमर, अध्यक्ष, सपाक्स (सवर्ण, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था)