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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में अब ई-व्हीकल से होगा पर्यटन, मढ़ई और पचमढ़ी आयोजित किया गया जागरूकता अभियान

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहनों से पर्यटन शुरू किया जा सकता है। इस दिशा में प्रयास किए जा चुके हैं और हाल ही में मढ़ई और पचमढ़ी में ई-व्हीकल जागरूकता अभियान के तहत प्रदर्शन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे के पूर्व छात्र और रिन्यूएबल एनर्जी विशेषज्ञ सुशील रेड्डी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अभियान के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को ई-व्हीकल की उपयोगिता, फायदे और पर्यावरणीय लाभों की जानकारी दी गई।

मढ़ई और पचमढ़ी में जागरूकता कार्यक्रम

मढ़ई में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की उपसंचालक पूजा नागले ने की। इसमें अधिकारियों, वाहन चालकों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को ई-व्हीकल की तकनीक और इससे होने वाले फायदों की जानकारी दी गई। इस दौरान सहायक संचालक अंकित जामोद और परिक्षेत्र अधिकारी भी मौजूद रहे।

पचमढ़ी में सहायक संचालक संजीव शर्मा और पश्चिम पचमढ़ी परिक्षेत्र अधिकारी की उपस्थिति में टैक्सी यूनियन के पदाधिकारियों और गाइडों के साथ विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस चर्चा में इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीक, उनकी कार्यप्रणाली और पर्यावरण हितैषी विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया।

ई-व्हीकल से प्रदूषण पर होगा नियंत्रण

सुशील रेड्डी ने बताया कि ई-व्हीकल तकनीक पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में अधिक ईंधन दक्षता प्रदान करती है और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करती है। इलेक्ट्रिक वाहनों से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, जिससे पर्यावरण को काफी फायदा होगा। इसके अलावा, ई-व्हीकल्स से जंगलों में प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण कम होगा, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में ई-व्हीकल के उपयोग से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी। यह कदम जंगल की जैव विविधता को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यटकों को भी एक नया और अनूठा अनुभव प्रदान करेगा। इसके अलावा, यह पारंपरिक वाहनों की तुलना में अधिक किफायती विकल्प भी साबित हो सकता है।

पहले भी हो चुकी है ई-व्हीकल की टेस्टिंग

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में ई-व्हीकल की टेस्टिंग पहले भी की जा चुकी है। पूर्व फील्ड डायरेक्टर कृष्णमूर्ति ने इस तकनीक को अपनाने की संभावनाओं की जांच की थी। अब इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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