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लखीमपुर खीरी हिंसा : आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, दिल्ली या लखनऊ में रहने का निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जेल में बंद पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को जमानत दे दी है। कोर्ट ने उन्हें दिल्ली या लखनऊ में रहने का निर्देश दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को इस मामले में सुनवाई तेज करने और समयसीमा तय करने का निर्देश दिया है।

पिछले साल 25 जनवरी को शीर्ष अदालत ने हिंसा की “दुर्भाग्यपूर्ण भयानक घटना” में आशीष मिश्रा को अंतरिम जमानत दी थी। साल 2021 में हुई इस हिंसा में आठ लोगों की मौत हुई थी।

तिकुनिया में हुई थी 8 लोगों की हत्या

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में 3 अक्टूबर, 2021 को हुई हिंसा में 8 लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस दिन यूपी के तत्कालीन डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य क्षेत्र के दौरे पर लखीमपुर पहुंचे थे। उनके साथ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा (टेनी) भी थे। मिश्रा का काफिला देख वहां प्रदर्शन कर रहे किसानों ने उन्हें काले झंडे दिखाए, जिसके बाद टेनी समर्थकों और किसानों में झड़प हो गई थी। यूपी पुलिस की एफआईआर के अनुसार जिस एसयूवी में आशीष मिश्रा बैठा था, उस गाड़ी ने चार किसानों को कुचल दिया था। घटना के बाद एसयूवी चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं को आक्रोशित किसानों ने पीट पीटकर मार डाला था। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी।

खारिज हो गई थी आशीष की जमानत

26 जुलाई 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आशीष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 19 जनवरी 2023 को आशीष के माले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि एक आरोपी को अनिश्चित काल के लिए कारावास में नहीं रखा जाना चाहिए जब तक कि अपराध साबित नहीं हुआ हो। हालांकि, कोर्ट ने उस दिन फैसला नहीं सुनाया था और इसे सुरक्षित रख लिया था। जिसके बाद 25 जनवरी 2023 को कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी।

यूपी सरकार ने किया था विरोध

19 जनवरी 2023 को हुई सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि यह एक गंभीर और जघन्य अपराध है। उन्होंने कहा कि आशीष को जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा। इस मामले में आशीष मिश्रा के अलावा 12 अन्य आरोपियों में अंकित दास, नंदन सिंह बिष्ट, लतीफ काले, सत्यम उर्फ ​​सत्य प्रकाश त्रिपाठी, शेखर भारती, सुमित जायसवाल, आशीष पांडे, लवकुश राणा, शिशु पाल, उल्लास कुमार उर्फ ​​मोहित त्रिवेदी, रिंकू राणा और धर्मेंद्र बंजारा शामिल हैं। सभी 13 आरोपी अभी जेल में हैं। इन पर दंगा, हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।

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