
श्योपुर। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर ‘वायु’ और ‘अग्नि’ नाम के दो चीतों को जंगल में छोड़ा गया। अधिकारी ने बताया कि उद्यान में चीतों की मौजूदगी आगंतुकों को सफारी के दौरान इन जानवरों को देखने का एक अनूठा अवसर प्रदान कर सकती है।
यह क्षेत्र अहेरा पर्यटन का हिस्सा है। अब सफारी यात्रा के दौरान पर्यटक चीते भी देख सकेंगे। इससे अब पर्यटकों के लिए भी चीतों का दीदार करने की उम्मीद जागी है।
सफारी के दौरान पर्यटक चीते भी देख सकेंगे
मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) और ‘लायन प्रोजेक्ट’ के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने एक विज्ञप्ति में बताया, “अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर अग्नि और वायु नाम के दो नर चीते को पारोंद क्षेत्र में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया। दोनों चीते स्वस्थ हैं।” उन्होंने कहा कि पारोंद क्षेत्र अहेरा पर्यटन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसलिए पर्यटक सफारी यात्राओं के दौरान चीतों को देख सकते हैं।
कूनो में 12 शावक सहित 24 चीते
श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में 12 शावक सहित 24 चीते हैं। जिनमें से दो को खुले जंगल में रिलीज कर दिया गया है। अब बाड़े में कुल 22 चीते हैं। इन्हें भी कूनो प्रबंधन के अधिकारी क्रमबद्ध तरीके से रिलीज करेंगे। अधिकारी ने बताया कि चीतों को पहले बाड़ों में रखा जाता है और अग्नि व वायु को छोड़ना भारत में इस प्रजाति को फिर से लाने के प्रयासों का हिस्सा है, जहां शिकार और अन्य कारणों से सात दशक पहले विलुप्त घोषित कर दिया गया था।
20 चीते लाए गए, 8 की मौत
2022 और 2023 में नामिबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीते कूनो लाए गए थे। इनमें से 8 वयस्क चीतों की मौत हो गई। वहीं, जन्मे 19 शावकों में से 12 अब जीवित हैं। इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए विशेषज्ञ बेहतर निगरानी और संरक्षण पर जोर दे रहे हैं।
चार दिसंबर को अग्नि और वायु नामक दो नर चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। यह कदम चीता स्टीयरिंग कमेटी की बैठक के बाद उठाया जा रहा है। अगले चरण में प्रभाष और पावक नामक चीतों को भी जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके अलावा, चीता कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है, जो मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को जोड़ेगा।
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