
नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र का आज बुधवार को तीसरा दिन और नई संसद में कार्यवाही का दूसरा दिन है। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन विधेयक) पर डिबेट शुरू हो गई है। सबसे पहले कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने लोकसभा में बिल के प्रावधानों के बारे में सदन में जानकारी दी। जिसके बाद कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि, पहली बार स्थानीय निकायों में स्त्री की भागीदारी तय करने वाला संशोधन मेरे जीवनसाथी राजीव गांधी ही लाए थे, जो राज्यसभा में 7 वोटों से गिर गया था।
राजीव गांधी का सपना आधा पूरा हुआ : सोनिया
बाद में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने ही उसे पारित कराया। आज उसी का नतीजा है कि देश के स्थानीय निकायों के जरिए 15 लाख चुनी हुई महिला नेता हैं। राजीव गांधी का सपना अभी तक आधा ही पूरा हुआ है। इस बिल के पारित होने के साथ ही वह पूरा होगा। इस बिल का कांग्रेस समर्थन करती है, हमें इस बिल के पास होने से खुशी है।
बिल में देरी भारत की स्त्रियों के साथ नाइंसाफी : सोनिया
कांग्रेस की मांग है इसे फौरन अमल में लाया जाए, लेकिन इसके साथ ही जातीय जनगणना कराकर एससी, एसटी, ओबीसी की महिलाओं के आरक्षण की व्यवस्था की जाए। सरकार को इसे साकार करनने के लिए जो कदम उठाने की जरूरत है वह उठाने की चाहिए। स्त्रियों के योगदान को स्वीकार करने और उसके प्रति आभार व्यक्त करने का यह सबसे उचित समय है। इस बिल को लागू करने में और देरी करना भारत की स्त्रियों के साथ घोर नाइंसाफी है। वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पूछा कि कांग्रेस ने निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण क्यों नहीं दिया था?
भाजपा सांसद बोले- ये सिर्फ PM का बिल
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि, ये सिर्फ PM मोदी का बिल है। जिसका गोल उसी का नाम आना चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री और हमारी पार्टी ये बिल लेकर आई है तो इनके पेट में दर्द हो रहा है।
क्या है महिला आरक्षण बिल ?
महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी या एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव है। 33 फीसदी कोटा के भीतर एससी, एसटी और एंग्लो-इंडियन के लिए उप-आरक्षण का भी विधेयक में प्रस्ताव है। इसके साथ ही प्रत्येक आम चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना भी विधेयक में प्रस्तावित है। इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के 15 साल बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण समाप्त हो जाएगा।
आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 15 फीसदी से कम है, जबकि राज्य विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से भी कम है। लोकसभा में 78 महिला सदस्य चुनी गईं, जो कुल संख्या 543 के 15 प्रतिशत से भी कम हैं। राज्यसभा में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व करीब 14 प्रतिशत है।
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