
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ‘कठमुल्ला’ शब्द के प्रयोग के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए उनके बयान को संविधान विरोधी करार दिया और इसे एक खास समुदाय को टारगेट करने की साजिश बताया। अलीगढ़ में समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे पर सवाल उठाए।
क्या है पूरा मामला
विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में ‘कठमुल्ला’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे विपक्ष ने आपत्तिजनक करार दिया। विपक्षी दलों का आरोप है कि योगी सरकार एक विशेष समुदाय को निशाना बना रही है और इसे लेकर खुलेआम भेदभावपूर्ण भाषा का उपयोग कर रही है।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई और कई नेताओं ने मुख्यमंत्री से माफी की मांग की। वहीं, न्यायालय ने इस शब्द को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा मानते हुए इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया।
विपक्ष का पलटवार, संविधान का हो रहा अपमान
योगी आदित्यनाथ के बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सपा छात्र सभा के अध्यक्ष मोहसिन मेवाती ने कहा, “मौजूदा सरकार में अन्याय और जुल्म हो रहा है। एक खास समुदाय को निशाना बनाकर बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर ऐसे ही हालात बने रहे, तो समाजवादी पार्टी बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेगी।”
कांग्रेस के प्रदेश सचिव राजा भैया ने इसे संविधान के खिलाफ करार देते हुए कहा, “संविधान के मंदिर में ही संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जो लोग कभी ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करते थे, वही अब धर्म और समुदाय के आधार पर भेदभाव कर रहे हैं। इससे बड़ा अन्याय और क्या होगा?”
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए और राज्यपाल को उनसे इस्तीफा लेने पर विचार करना चाहिए।
सीएम योगी की टिप्पणी को लेकर विपक्ष की मांग
राज्यपाल से मुख्यमंत्री का इस्तीफा लेने की मांग। मुख्यमंत्री को विधानसभा में बयान वापस लेकर सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। अगर माफी नहीं मांगी गई, तो सपा और कांग्रेस बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे।
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