जबलपुरमध्य प्रदेश

जबलपुर में सबसे ज्यादा दूषित हो रहा नर्मदा का पानी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी में पेश की अपनी रिपोर्ट

जिस नर्मदा नदी को मां मानकर शहरवासी पूजा करते हैं आज वही नर्मदा जबलपुर में सबसे ज्यादा प्रदूषित हो रही है। सीवेज का पानी सीधे नदी में मिलने से यहां पानी की गुणवत्ता पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। यह कहना है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का, जिसने हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को अपनी रिपोर्ट सौंपी है।

नर्मदा में रोज मिल रही इतनी गंदगी

एनजीटी में पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर के ग्वारीघाट, तिलवाराघाट और भेड़ाघाट सहित कई तटीय इलाकों में सीवेज समेत अन्य तरह की गंदगी सीधे नदी में मिल रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जबलपुर में रोज 136 एमएलडी सीवेज की गंदगी नर्मदा के जल में मिल रही है। इससे ऐसी स्थिति है कि यहां के तटों पर नर्मदा का पानी आचमन करने लायक भी नहीं बचा है।

नर्मदा को दूषित करने में जबलपुर नंबर-1

Narmada Sewage
ग्वारीघाट।

जांच में रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसके मुताबिक नदी में सबसे कम गंदगी ओंकारेश्वर में (0.32 एमएलडी ) मिल रही है। वहीं भेड़ाघाट में 0.63, नेमावर में 0.98, बुधनी में 1.5, धरमपुरी में 1.7, खलघाट धार में 1.7, बरवाहा में 3.2, बड़वानी में 3.6 महेश्वर में 4.8, डिंडोरी में 8.03, होशंगाबाद में 10 और जबलपुर में सबसे ज्यादा 136 एमएलडी सीवेज की गंदगी नदी में मिल रही है।

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नागरिक उपभोक्ता मंच ने दायर की थी याचिका

नागरिक उपभोक्ता मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे व अन्य ने नर्मदा में हो रहे प्रदूषण को लेकर एनजीटी में याचिका दर्ज कराई थी। एनजीटी ने 20 फरवरी 2021 को मुख्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कलेक्टर्स को कार्रवाई के लिए निर्देश दिए थे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से नर्मदा में मिल रही सीवेज की गंदगी को लेकर भी जवब तलब किया गया था, जिसका पीसीबी ने जवाब दिया है।

एनजीटी का आदेश।

कलेक्टर्स को कार्रवाई के निर्देश

एनजीटी ने आंकड़ों के आधार पर सभी जिलों के कलेक्टर्स को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। नर्मदा में गंदगी फैलाने वालों को चिन्हित कर उनपर सख्त कार्रवाई करने के साथ-साथ सीवेज ट्रीटमेंट को लेकर योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं जबलपुर के ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, कठौंदा प्लांट को जल्द से जल्द चालू करने के निर्देश दिए गए हैं।

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