
मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई हुई। शिवराज सरकार द्वारा दायर मॉडिफिकेशन एप्लीकेशन में कोर्ट ने सारे तथ्यों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट बुधवार या गुरुवार को अपना फैसला सुना सकता है।
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सरकार ने लगाई मॉडिफिकेशन याचिका
बता दें कि 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शिवराज सरकार की ओर से 12 मई की देर रात एप्लिकेशन फॉर मॉडिफिकेशन दाखिल की गई है। सरकार ने ट्रिपल टेस्ट की निकायवार रिपोर्ट पेश की है। बता दें कि मॉडिफिकेशन याचिका करने से पहले 11 मई को सीएम ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ मीटिंग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी और जानकारी
नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया कि हमने जो याचिका लगाई थी, उस पर आज सुनवाई हुई। 2 घंटे तक सरकार ने अपना पक्ष रखा। नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण मिले इसकी मांग की गई। बुधवार 10:30 या गुरुवार दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी। जो जानकारी आज सुप्रीम कोर्ट ने मांगी है उसे सरकार जल्द प्रस्तुत करेगी। गौरतलब है कि शिवराज सरकार सुप्रीम कोर्ट में राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की वार्ड वार रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है।
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ओबीसी को 27% सीट देने का ऐलान
इधर, बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ओबीसी आरक्षण खत्म करने का आरोप एक-दूसरे पर लगाना शुरू कर दिया। दोनों ही राजनीतिक दलों ने बिना आरक्षण के चुनाव होने पर ओबीसी वर्ग को साधने के लिए 27 प्रतिशत टिकट ओबीसी नेताओं को देने का ऐलान किया था।
राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारी तेज
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कराने की तैयारी तेज कर दी है। आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने सभी जिलों के कलेक्टर्स के साथ बातचीत की। उन्होंने साफ कहा कि दोनों ही चुनाव जून माह में करा लिए जाएंगे। पंचायत चुनाव बैलेट पेपर और नगरीय निकाय चुनाव ईवीएम से होंगे।