
उमरिया के सामुदायिक भवन में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में हजारों लोगों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस मौके पर श्रीमद्भगवद्गीता के गूढ़ संदेशों और उसका सामूहिक पाठ भी हुआ। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के तहत स्कूल में गीता का पाठ का आयोजन किया गया।
केवल धर्मग्रंथ नहीं बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है गीता
समारोह में बांधवगढ़ के भाजपा विधायक शिवनारायण सिंह ने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” का उल्लेख करते हुए बताया कि यह संदेश आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने गीता को जीवनशैली में अपनाने योग्य शिक्षा बताया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि गीता केवल एक धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए है। उनका यह दृष्टिकोण गीता के सार्वभौमिक महत्व को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। मानव जीवन में स्थिरता जरूरी है, जिसमें व्यक्ति हर परिस्थिति में फल की चिंता न करते हुए कर्म करता रहे। आध्यात्मिकता और भौतिकता में संतुलन जीवन में आध्यात्मिक जागरूकता और भौतिक उपलब्धियों के बीच संतुलन बनाना है।
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