छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित साड़ी घोटाला जांच फाइलों में दफन! आखिर किसे बचाने में जुटा महिला एवं बाल विकास विभाग?
साड़ी सप्लाई से पहले गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी मुंबई की राइट्स लिमिटेड को सौंपी गई थी। एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर ही सप्लाई को हरी झंडी मिली थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि बाद में साड़ियों में खामियां मिलीं तो क्या जांच एजेंसी ने गलत रिपोर्ट दी थी या फिर वास्तविक रिपोर्ट को दबाया गया? हैरानी की बात यह है कि अब तक न तो जांच एजेंसी की जवाबदेही तय हुई है और न ही उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की गई
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