
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2002 के गोधरा कांड के एक दोषी को जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, फारूक 17 साल (2004 से) जेल में रह चुका है। इसलिए उसे जमानत दी जाए। आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दोषी की अपील 2018 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी। इस मामले के कई दोषियों की सजा के खिलाफ अपील शीर्ष अदालत में लंबित है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया जमानत का विरोध
गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि, “यह सबसे जघन्य अपराध में से एक था। जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित 59 लोगों को जिंदा जला दिया गया था। सामान्य परिस्थितियों में पत्थरबाजी कम गंभीर अपराध हो सकता है, लेकिन यह अलग है।”
लोगों को बोगी में बंद करके जिंदा जलाया गया था और ट्रेन पर पत्थरबाजी की गई ताकि, जलती ट्रेन से लोग उतर न पाएं और उनकी मौत हो जाए। इसके अलावा फायर टेंडर पर भी पत्थर फेंके गए।
2002 में साबरमती एक्सप्रेस में लगा दी गई थी आग
27 फरवरी 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के एक कोच में भीड़ ने आग लगा दी गई थी। इस घटना में 59 लोगों की जलकर मौत हो गई थी। जिसके बाद गुजरात में 2002 के दंगे हुए थे। दोषी फारूक पर पत्थरबाजी और हत्या करने का मामला साबित हुआ था।