
नई दिल्ली। वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर और धुंध से पिछले 10 दिन से परेशान दिल्लीवासियों को गुरुवार रातभर हुई बारिश के कारण राहत मिली। शुक्रवार सुबह भी हल्की बारिश हुई। राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता में शुक्रवार को सुबह स्पष्ट सुधार देखा गया।
भगवान ने लोगों की सुन लीं प्रार्थनाएं
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम परिणाम देखना चाहते हैं, हम तकनीकी लोग नहीं हैं। हर साल जब हम दखल देते हैं तभी यह मुद्दा चर्चा में आता है। हमारे पास कई रिपोर्ट और समितियां हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो रहा। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने सरकार से पूछा कि पिछले 6 साल से आप क्या कर रहे थे। शायद भगवान ने दिल्ली के लोगों की प्रार्थनाएं सुन लीं। सरकार का प्रदूषण कम करने में कोई योगदान नहीं है। पराली जलाने की घटनाएं रोकनी होंगी।
AQI में और सुधार होने की उम्मीद
दिल्ली में गुरुवार शाम 4 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI ) 437 था, जो शुक्रवार सुबह सात बजे 408 और फिर दो घंटे बाद 9 बजे तेजी से सुधरकर 376 रहा। प्रदूषक तत्वों के फैलाव के लिए हवा की गति अनुकूल होने के कारण वायु गुणवत्ता में और सुधार होने की उम्मीद है। AQI पिछले 24 घंटे के आंकड़ों का औसत होता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि दिल्ली के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला ने शुक्रवार को सुबह साढ़े 8 बजे पिछले 24 घंटों में 6 मिमी बारिश दर्ज की।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के अधिकतर इलाकों में हल्की बारिश हुई। इसके अलावा नोएडा, गुरुग्राम और अन्य पड़ोसी इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश हुई। आईएमडी ने हल्की बारिश समेत मौसम संबंधी अनुकूल परिस्थितियों के कारण दीपावली से पहले वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार होने का अनुमान जताया है।
पराली जलाए जाने से रोकनी होंगी
अधिकारियों ने कहा था कि एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की तरफ बदलने से, भारत के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में पराली जलाए जाने से निकलने वाले धुएं के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा था कि पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद हवा की गति मौजूदा समय में लगभग पांच से छह किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 11 नवंबर को लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे हो जाएगी, जिससे दीपावली से पहले प्रदूषक तत्वों के तितर-बितर होने की संभावना है।
प्रदूषण के लिए पड़ोसी राज्य जिम्मेदार
दिल्ली में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने वाले ‘डिसीजन सपोर्ट सिस्टम’ के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को 38 फीसदी प्रदूषण के लिए पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में पराली जलाए जाने से निकला धुआं जिम्मेदार था। शहर में प्रदूषण के स्तर में पराली जलाने की घटनाओं का योगदान बृहस्पतिवार को 27 फीसदी रहा, जबकि शुक्रवार को इसके 16 फीसदी रहने का अनुमान है।
जानिए एयर क्वालिटी और उसका प्रभाव
- 0-50 गुड न्यूनतम प्रभाव।
- 51-100 सेटिसफेक्टरी संवेदनशील लोगों को सांस लेने में मामूली तकलीफ।
- 101-200 मॉडरेट फेफड़े, दमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सांस लेने में तकलीफ।
- 201-300 पुअर ज्यादातर लोगों को लंबे समय तक सांस लेने में तकलीफ।
- 301-400 वेरी-पुअर लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस की बीमारी।
- 401-500 सीवियर स्वस्थ लोगों पर प्रभाव और बीमार वाले लोगों पर गंभीर रूप से प्रभाव।