
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने गुरुवार (7 नवंबर) को दिल्ली में आयोजित ‘आतंकवाद विरोधी सम्मेलन-2024’ (Anti-Terror Conference – 2024) के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। अमित शाह ने कहा कि सरकार आतंकवाद, आतंकवादियों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र से लड़ने के लिए जल्द ही एक राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति लाएगी।
आतंकवाद की कोई क्षेत्रीय सीमा नहीं होती – शाह
शाह ने कहा कि कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है, लेकिन आतंकवाद की कोई क्षेत्रीय सीमा नहीं होती, इसलिए सभी सुरक्षा एजेंसियों – केंद्रीय और राज्य – को निकट समन्वय के साथ काम करना चाहिए, संयुक्त रणनीति बनानी चाहिए और खुफिया जानकारी साझा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के रूप में एक मॉडल दृष्टिकोण पेश किया है, जिसे यदि अपनाया जाता है तो यह आतंकवाद की समस्या से निपटने के लिए एक साझा ढांचे और मंच के रूप में काम करेगा।
गृह मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के सपने के अनुसार 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए हर किसी को सभी सुरक्षा चुनौतियों से निपटना होगा और आतंकवाद से लड़ने के लिए एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को युवा अधिकारियों को प्रशिक्षित करना पड़ेगा और आतंकवाद से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करना होगा।
हम आतंकवाद को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध – शाह
शाह ने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश आतंकवाद के खिलाफ ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। हम आतंकवाद को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। गृह मंत्री ने कहा कि अब पूरी दुनिया ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की पीएम मोदी की नीति को स्वीकार कर लिया है। वर्ष 2014 से आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए शाह ने पिछले दशकों की तुलना में आतंकी घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी होने का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से पिछले 10 वर्षों में जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा पर काफी हद तक नियंत्रण किया गया है। शाह ने सम्मेलन में राज्य पुलिस बलों के प्रतिनिधियों, जिनमें से अधिकतर डीजीपी रैंक के अधिकारी हैं से कहा कि जहां भी आवश्यक हो, वहां वे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम लागू करें।