जबलपुरताजा खबरमध्य प्रदेश

30 हजार तक की जयमाला, शादी से एनिवर्सरी तक डिमांड

महंगे सीजनल फूलों से लेकर सूखे मेवे, मोर पंख व मोतियों तक का होता है इस्तेमाल

नरेन्द्र सिंह-जबलपुर। शादियों से लेकर विवाह की वर्षगांठ तक में आजकल महंगी और डिजाइनर जयमाला का चलन है। जबलपुर के श्रीनाथ की तलैया स्थित फूलमंडी से लेकर सदर बाजार की फूलों की दुकानों में 3 से 30 हजार रुपए तक की जयमाला उपलब्ध हैं। इनकी खास बात यही है कि इन्हें बनाने में महंगे सीजनल फूलों से लेकर सूखे मेवे, मोर पंख व मोतियों तक का इस्तेमाल किया जाता है।

इनमें 10 से 20 हजार तक की जयमाला तो आर्डर पर बुक करवाई जाती हैं वहीं इनसे अधिक कीमत की जयमाला के लिए केटलॉक देखकर करीब 75 फीसदी राशि एडवांस जमा करवाई जाती है। इस प्रकार की माला बनाने वाले रोहित वीस्टी का कहना है कि हमारे पास 3 हजार से 30 हजार तक की माला उपलब्ध है। इन मालाओं की डिमांड विवाह समारोह से लेकर वैवाहिक वर्षगांठ तक में हो रही हैं।

ऐसे बनती है माला

यदि माला स्टैंडर्ड साइज यानि ढाई फीट की है तो दो जयमाला में 3 किलो सूखे मेवे इस्तेमाल किए जाते हैं जो कि 5 से 6 हजार रुपए के होते हैं। इनकी सजावट पर 1 हजार,बनवाई 2 हजार और मुनाफा 1 हजार मिलाकर कुल 10 हजार में 2 जयमाला दी जाती हैं। वहीं आयातित फूलों की जयमाला भी इतनी ही राशि में हम देते हैं। मोर पंख से बनाई जाने वाली जयमाला में भी 4 से 5 किलो मोर पंख का इस्तेमाल होता है जो कि 2 हजार रुपए किलो मिलता है। कई ग्राहक जयमाला का साइज 5 फीट तक का मांगते हैं जिसमें यह राशि दोगुनी या इससे अधिक हो जाती है।

वजन : ढाई से 5 किलो

माला बनाने वाले नितिन कहते हैं कि जयमाला का आकार ढाई से 5 फीट का होता है जिसका वजन भी ढाई से पांच किलो तक हो जाता है। इसमें यदि केवल मेवे की जयमाला बनवाई जाती है तो इसकी कीमत 15 हजार तक होती है। इसमें हम 2 से 3 किलो तक सूखे मेवे का इस्तेमाल करते हैं ।

मैंने अपनी बहन की शादी में मेवे से 5 फीट की 2 जयमाला बनवाई थीं जिनकी कीमत 30 हजार रुपए दी थी। इनमें करीब 8 किलो सूखे मेवे और विदेशी फूलों,मोरपंख का इस्तेमाल हुआ था। कार्यक्रम के बाद युगल को ये माला भी गिफ्ट कर दी गई थीं। -नितिन अग्रवाल, व्यवसाई, जबलपुर

संबंधित खबरें...

Back to top button