
अमूमन रॉक बैंड बड़े शहरों से निकलते हैं और तब राष्ट्रीय स्तर के संस्थान उन्हें अपने यहां परफॉर्मेंस देने के लिए बुलाते हैं, लेकिन मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) में तूर्यनाद समिति द्वारा आयोजित अखिल भारतीय हिंदी महोत्सव तूर्यनाद – 23 में छोटे से शहर गुना निकले देश के पॉपुलर शिवाय बैंड को बुलाया गया। शुक्रवार को इस बैंड ने हिंदी गीतों की प्रस्तुति, खासतौर पर शिव भजनों को रॉक स्टाइल में सुनाकर युवाओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। इन्होंने भगवान शंकर के भजन आदि योगी से शुरुआत कर समां बांध दिया। बैंड लीडर शिवाजी सुरवे ने बताया कि यूं तो मैं टीचर हूं लेकिन संगीत के संस्कार परिवार से मिले। मुझे लगता है कि पढ़ाई के साथ संगीत को जोड़ दिया जाए तो स्टूडेंडट्स का बहुत सारा तनाव कम हो सकता है।
साल 2016 में बना था शिवाय बैंड
इस बैंड की खासियत यह है कि भजन हो या कोई भी गीत उसको रॉक स्टाइल में श्रोताओं के सामने पेश किया जाता है। बैंड द्वारा खुद के बनाए लगभग दस गीत हैं। इसके अलावा पब्लिक डिमांड पर सूफी गीतों को भी गाते हैं। ज्यादातर भगवान शंकर के भजनों की प्रस्तुति देते हैं। बैंड में कुल तीन सदस्य परमानेंट हैं। यह बैंड साल 2016 में बना था।
परिवार से मिला संगीत
मुझे मेरे परिवार से संगीत विरासत में मिला है। घर के अधिकांश बड़े बुजुर्ग गायक हैं। मुझे भी लगा कि मुझे कुछ अलग करना चाहिए, इसलिए मैंने बैंड बनाया। सिंगिंग के अलावा में प्राइवेट स्कूल में टीचर हूं। -शिवाजी सुरवे, संयोजक, शिवाय बैंड
50 से अधिक प्रस्तुतियां दीं
मैं पिछले 10 साल गिटार बजा रहा हूं। बैंड के साथ में शुरू से ही जुड़ा हुआ हूं। अब तक 50 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुका हूं। इसके अलावा में गवर्नमेंट जॉब में हूं। संगीत का शौक बचपन से था। -मयंक पांडे, सदस्य, शिवाय बैंड