
भोपाल। “मिट्टी है तो हम हैं, मिट्टी नहीं तो सब कुछ मिट्टी है। एक हजार साल लगते हैं एक इंच मिट्टी बनने में, फिर भी मिट्टी को बर्बाद किया जा रहा है। अंधाधुंध पेस्टीसाइड्स और फर्टिलाइलजर से जमीन की उर्वर क्षमता खत्म हो रही है।” यह चेतावनी भोपाल स्थित भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान में मंगलवार से शुरू हुए चार दिवसीय भारतीय मृदा विज्ञान सोसायटी के 87 वें वार्षिक सम्मेलन में मृदा (मिट्टी) और कृषि वैज्ञानिकों ने दी। इसमें देशभर के 300 से ज्यादा कृषि और मृदा वैज्ञानिक मिलेट्स के अधिक उत्पादन को लेकर भी एक्शन प्लान फाइनल करेंगे।
श्रीअन्न (मिलेट्स) पर स्पेशल अटेंशन
भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. एसपी दत्ता के मुताबिक इस सम्मेलन का प्रमुख विषय सॉइल साइंस का विकास करना है, जिसमें मिट्टी की उर्वरता, पौधों का पोषण, मिट्टी रसायन विज्ञान, मिट्टी जीव विज्ञान, मिट्टी और पर्यावरण जैसे सब्जेक्ट शामिल हैं। इनके अलावा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोत और इसके साथ मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन पर भी रिसर्च को लेकर चर्चा होगी। लोगों के आहार में मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, रागी, कोंदो, कुटकी इत्यादि के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए भारत में श्रीअन्न के उत्पादन और उसके विस्तार के लिए देशभर से 300 प्रतिनिधि अपने-अपने रिसर्च पेपर पढ़ेंगे।
अब तक 22 करोड़ सॉइल कार्ड बनाए
देश में मिट्टी की सेहत को बचाने और सरंक्षित करने के लिए अभी तक 22 करोड़ सॉइल कार्ड बनाए गए हैं। ये सॉइल कार्ड किसानों को जागरुक करके उर्वरक और पेस्टीसाइड्स के प्रयोग के बारे में वास्तविक जरूरत बताने में बेहद अहम रोल अदा करते हैं। यह जानकारी देते हुए महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि भारतीय मृदा विज्ञान सोसायटी 87 साल से इसी दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने एमपी में भी जमीन की बनावट और उसकी उर्वरा शक्ति को बचाए रखने के बारे में वैज्ञानिकों से सशक्त भूमिका निभाने की अपील की। इस कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. एसपी दत्ता, महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. हिमांशु पाठक तथा डॉ. एसके चौधरी ने संबोधित किया। इस दौरान एक स्मारिका के विमोचन के अलावा सॉइल साइंस में उत्कृष्ट काम करने वाले साइंटिस्ट्स और रिसर्चर्स को अवॉर्ड भी दिए गए।
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