
बिजनेस डेस्क। अडानी समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) ने अपने संयुक्त उद्यम (JV) अडानी विल्मर लिमिटेड से पूरी तरह बाहर निकलने का फैसला लिया है। इस समझौते के तहत अडानी एंटरप्राइजेज अपनी 13% हिस्सेदारी बेचकर अडानी विल्मर से अलग हो जाएगी। वहीं, विल्मर इंटरनेशनल की सहायक कंपनी लेंस ने अडानी विल्मर में 31% हिस्सेदारी हासिल करने पर सहमति जताई है।
कैसे हुआ समझौता
अडानी समूह ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि यह समझौता तीन प्रमुख पक्षों के बीच हुआ है:
- अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL)
- अडानी कमोडिटीज एलएलपी (ACL), जो AEL की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
- विल्मर इंटरनेशनल की सहायक कंपनी लेंस।
समझौते के तहत लेंस, ACL के पास मौजूद अडानी विल्मर के 31% इक्विटी शेयरों का अधिग्रहण करेगी। इसके अलावा, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड अपनी 13% हिस्सेदारी बेचेगी, ताकि भारतीय शेयर बाजार की न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी आवश्यकताओं (MPS) को पूरा किया जा सके। इस समझौते के साथ ही अडानी समूह अडानी विल्मर के प्लेटफॉर्म से पूरी तरह बाहर हो जाएगा।
कंपनी का नाम बदलेगा
इस सौदे के बाद, अडानी विल्मर लिमिटेड के नाम में बदलाव भी किया जाएगा। दोनों पक्षों ने नाम बदलने पर सहमति जताई है। इसके अतिरिक्त, ACL द्वारा नामित निदेशक अडानी विल्मर के बोर्ड से इस्तीफा देंगे। अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने कहा है कि वह इस डील से प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल अपने कोर बिजनेस को बढ़ाने में करेगी। कंपनी ने एनर्जी एवं यूटिलिटी, ट्रांसपोर्ट एवं लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बड़े निवेश की योजना बनाई है।
अडानी विल्मर का FMCG क्षेत्र में योगदान
अडानी एंटरप्राइजेज और विल्मर इंटरनेशनल द्वारा स्थापित अडानी विल्मर आज भारतीय FMCG बाजार में तेजी से उभर रही कंपनियों में से एक है। कंपनी का 100% अर्बन कवरेज है और यह भारत के 30,600 से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद है। इसके अलावा, अडानी विल्मर 30 से अधिक देशों को उत्पाद निर्यात करती है। कंपनी के प्रमुख उत्पादों में खाद्य तेल, गेहूं के उत्पाद, चावल, दालें और शक्कर शामिल हैं। 27 दिसंबर तक अडानी विल्मर का बाजार पूंजीकरण 42,785 करोड़ रुपए (लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर) था।
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