
वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग नहीं होगी। ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में मिली शिवलिंग जैसी संरचना की उम्र, लंबाई और चौड़ाई का पता लगाने के लिए पांच हिंदू महिलाओं ने वैज्ञानिक जांच की मांग की थी। अदालत ने यह मांग खारिज कर दी।
क्यों की गई कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग
जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश देने की अपील की गई थी। अदालत ने यह मांग खारिज कर दी। इस मामले में 7 अक्टूबर को हिंदू पक्ष ने अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए दावा किया था कि, वजूखाने में मिला शिवलिंग उनके वाद का हिस्सा है। इस वजह से कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग रखी गई है।
कोर्ट ने क्यों खारिज की मांग
कोर्ट ने मांग को खारिज करते हुए कहा कि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जहां कथित शिवलिंग पाया गया है, उसे सुरक्षित रखा जाए। ऐसे में अगर कार्बन डेटिंग के दौरान कथित शिवलिंग को क्षति पहुंचती है तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा। ऐसा होने से आम जनता की धार्मिक भावनाओं को भी चोट पहुंच सकती है।
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क्या होती है कार्बन डेटिंग?
कार्बन डेटिंग से पुरातात्विक खोज, हड्डी, चमड़े, लकड़ी, चारकोल, बाल और खून के अवशेष की उम्र पता चल सकती है। इससे एक अनुमानित उम्र ही पता चलती है, सटीक उम्र का पता लगाना मुश्किल होता है। इससे 20 हजार साल पुरानी वस्तुओं की उम्र का पता लगाया जा सकता है। कार्बन डेटिंग विधि की खोज 1949 में की गई थी।
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