
हैदराबाद/भोपाल। कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में देश ने एक और कदम बढ़ाया है। इसके लिए ओलेक्ट्रा ग्राीनटेक लिमिटेड ने रिलायंस के साथ मिलकर हाइड्रोजन बस का निर्माण किया है। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (MEIL) की सहायक कंपनी ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड की यह बसें अब सड़कों पर दौड़ने के लिए तैयार हैं।
अब तक ई बसें बना रही थी ओलेक्ट्रा
पारंपरिक सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में ओलेक्ट्रा पहली बार पूरी तरह से कार्बन मुक्त हाइड्रोजन बस लेकर आया है। अब तक यह कंपनी ई बसें बना रही थी। कंपनी का दावा है कि इस बस से न सिर्फ वायु, बल्कि जल प्रदूषण भी रुकेगा। पूरी तरह से हाइड्रोजन से चलने वाली यह बसें सरकार के कार्बन मुक्त हाइड्रोजन ईंधन के अभियान को मजबूती देने वाली हैं।
49 सीटर बस, 15 मिनट में होगी फुल टैंक
- 12 मीटर है लो-फ्लोर हाइड्रोजन बस। 32 से 49 सीटर है बस।
- एक बार फुल टैंक होने पर करेगी 400 किमी का सफर।
- 15 मिनट में फुल हो जाएगा बस का हाइड्रोजन टैंक।
- यह बस सिर्फ पानी का उत्सर्जन करेगी। पुरानी बसें इससे होंगी रिप्लेस।
- टाइप-4 हाइड्रोजन सिलेंडर लगे हैं बस के ऊपर।
- 85 डिग्री से लेकर माइनस 20 डिग्री तक तापमान सह सकते हैं सिलेंडर।
- 2000 में बनी कंपनी ई बसों का कर रही निर्माण।
पॉवर ट्रांसमिशन की सबसे बड़ी कंपनी
ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। यह भारत में इलेक्ट्रिक बसों का निर्माण कर रही है। मुंबई, पुणे, हैदराबाद समेत तमाम शहरों में कंपनी की ई बसें चल रही हैं। ओलेक्ट्रा पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के लिए लगनेवाले सिलिकॉन रबर/कम्पोजिट इंसुलेटर के भारत की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है।