
भोपाल। देवास जिले में मौजूद खिवनी अभयारण्य में वन्यप्राणी बढ़ाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इसी क्रम में अभयारण्य प्रशासन ने खातेगांव और कन्नौद का करीब 50 वर्ग किलोमीटर का अतिरिक्त एरिया मांगा है लेकिन, वन्यप्राणी मुख्यालय में यह प्रपोजल एक माह से पेंडिंग हैं। वहीं स्थानीय विधायक ने सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया है।
खिवनी अभयारण्य मालवा के अंतिम छोर तक फैला है। करीब 134 वर्ग किलोमीटर के अभयारण्य में इस समय एक मादा टाइगर सहित कुल चार टाइगर हैं। एरिया कम पड़ने से शावक कई बार टैरेटिरी से बाहर निकल जाते हैं। टाइगर आदि के लिए शाकाहारी वन्यप्राणियों की संख्या भी बहुत कम हैं। यहां के लिए कई बार चीतल आदि की मांग की जा चुकी है। सुविधाएं नहीं होने से ज्यादा पर्यटक नहीं आते हैं।
10 साल का प्लान बनाया, बताया भी नहीं: विधायक
खातेगांव के भाजपा विधायक आशीष शर्मा कहते हैं कि खिवनी अभयारण्य का विकास बहुत जरूरी है, यहां मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से पर्यटकों को निराशा हाथ लग रही है। उन्होंने मांग की है कि सेंक्चुरी में वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए तथा कॉटेज भी अधिक हों। नाइट सफारी प्रारंभ करने पर भी विधायक ने जोर दिया है। उनका कहना है कि अभयारण्य के लिए 10 साल का प्लान बनाया गया है लेकिन इस बारे में उनके साथ अब तक कोई चर्चा नहीं हुई है।
3 साल में 6 करोड़ ही मिले
खिवनी अभयारण्य के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 से जुलाई 2023 तक 5.91 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है। जबकि सेंचुरी के लिए हर साल तीन करोड़ की आवश्यकता है।
एरिया बढ़ाने प्लान भेजा है
खिवनी अभयारण्य में खातेगांव और कन्नौद का 50 वर्ग किमी का अतिरिक्त एरिया मांगा है। कई बार टाइगर के बच्चे बाड़े से बाहर निकल जाते हैं। इसे टूरिस्ट पॉइंट बनाने की सभी संभावनाएं हैं। -विकास लाहोरे, अधीक्षक, खिवनी अभयारण्य
सेंक्चुरी पर एक नजर
- मध्यप्रदेश के देवास एवं सीहोर जिले में 134 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।
- र्यटकों की संख्या लगातार गिर रही है। 2021-22 में 1046 पर्यटक आए तो 2023 में ये संख्या 872 रह गई।
- एक मादा टाइगर सहित कुल चार टाइगर हैं।
- 13 बीटों में बंटा है। सुविधाएं कम होने से लगातार घट रही पर्यटकों की संख्या।