
राजीव सोनीभोपाल। मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रहे धार्मिक-सांस्कृतिक और एडवेंचर टूरिज्म के चलते देशीविदेशी सैलानियों को ठहरने के लिए होमस्टे का कॉन्सेप्ट रास आने लगा है। प्रदेश में उज्जैन, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों के साथ ओरछा, खजुराहो, मंडला, सतना, छिंदवाड़ा सहित ओंकारेश्वर जैसे नगरों में होम-स्टे को मिल रहे रिस्पांस को देख सरकार भी उत्साहित हो उठी है। करीब तीन दर्जन जिलों के 100 से अधिक गांवों को इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में जल्दी ही करीब एक हजार होम स्टे शुरू कराए जाएंगे। प्रदेश के ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में अभी 292 होम-स्टे संचालित हो रहे हैं।
ये हैं प्रमुख जिले
सीहोर, छतरपुर, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, निवाड़ी, सीधी, सतना, रायसेन, उमरिया, मंडला, सिवनी, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा,धार, उज्जैन, झाबुआ, दमोह, शिवपुरी, कटनी, डिंडोरी, पन्ना, बालाघाट, राजगढ़, आगर, मुरैना, जबलपुर, देवास, खरगोन, बैतूल और अशोकनगर जिले चिन्हित किए गए हैं। इनमें से कुछ स्थानों पर होम स्टे संचालित हो रहे हैं।
लुभा रहा है ग्रामीण परिवेश
तीन साल में उम्मीद से ज्यादा रिस्पांस मिला। नतीजे उत्साहजनक हैं। देशी-विदेशी पर्यटकों को हमारे गांव की संस्कृति और भोजन काफी आकर्षित कर रहा है। हमने अब 2 कमरे और बनवा लिए हैं। कुल 4 कमरे हैं। हमें मिले अच्छे नतीजों के बाद अब कई नए लोगों ने भी होम स्टे खोलने के लिए हमसे मार्गदर्शन लिया है। -उमा पाठक , महुआ होम स्टे लाड़पुरा ओरछा
सीधी बात धर्मेंद्र लोधी मंत्री, धर्मस्व, पर्यटन-संस्कृति
- होम स्टे के लिए सरकार नया क्या कर रही है? होम-स्टे को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। अब जिलों को चिन्हित कर गांवों में एक हजार नए होम स्टे को मंजूरी देने का प्लान है।
- शहरी अथवा ग्रामीण क्षेत्रों में से ज्यादा डिमांड कहां से है? देशी और विदेशी सैलानियों को हमारी संस्कृति और ग्रामीण परिवेश ज्यादा लुभा रहा है।
- योजना से गांवों में कितना रोजगार बढ़ेगा, कोई आकलन? महानगरों के आईटी प्रोफेशनल्स भी इसमें रुचि ले रहे हैं। इससे गांवों में रोजगार भी बढ़ रहा है। आने वाले समय में यहां पर पर्यटक बढ़ेंगे।