
अशोक गौतम-भोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए इस बार भाजपा और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को ज्यादा पसीना बहाना पड़ रहा है। इसके पीछे बड़ा कारण दोनों दलों के नाराज नेताओं का पाला बदलकर बसपा सहित अन्य दलों का दामन थाम लेना है। कई नेता चुनाव मैदान में भी आ गए हैं। इससे बसपा और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में त्रिकोणीय मुकाबले हो गए हैं।
यूपी से लगी बसपा प्रभावित 23 और आदिवासी बहुल 20 प्रमुख विधानसभा सीटों पर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सभाएं हो रही हैं। पीएम और शाह वर्तमान में यहां कई चुनावी सभाएं कर चुके हैं। एक साल पहले राहुल गांधी की यात्राएं भी इन्हें क्षेत्रों पर फोकस करते हुए हुई थीं। अब फि र से इन्हीं सीटों पर दोनों पार्टियों का फोकस है।
आदिवासी बहुल सीटों पर स्थानीय पार्टियों की पकड़
आदिवासी बहुल सीटों पर स्थानीय पार्टियों की पकड़ मजबूत है। इसमें धौहनी, देवसर, जौरा, ब्यौहारी, शहपुरा, डिंडोरी, बिछिया, निवास, परसवाड़ा, बालाघाट, भिंड, अमरवाड़ा, मेहगांव, जतारा, पृथ्वीपुर, निवाड़ी, राजनंदगांव और गुढ़ सीटें शामिल हैं।
बीएसपी यहां पर मजबूत
भिंड की सीट पर बसपा मजबूत है। 2018 के चुनाव में पार्टी को यहां 46 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थे। देवतालाब में पार्टी को 32 फीसदी वोट मिले थे। पोहरी में भी पार्टी का प्रतिशत इतना ही था। वहीं ग्वालियर ग्रामीण जैसी सीट पर 31 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए थे।
विंध्य में पीएम मोदी, शाह, नड्डा ले चुके सभाएं
विंध्य की 30 सीटों पर भाजपा को खिसकते जनाधार को लेकर चिंता सता रही है। यहां पिछले 10-15 दिनों के अंदर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा आएसएस के प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह, जेपी नड्डा लगातार सभाएं ले रहे हैं। सीएम शिवराज सिंह चौहान लगातार दौरे कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम खुद अपने विधानसभा क्षेत्र देवतालाब से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ग्वालियर चंबल क्षेत्र में बसपा के अलावा सपा का भी प्रभाव काफी है। इन क्षेत्र में मोदी, शाह के अलावा सिंधिया भी सक्रिय हैं।
सिंगरौली में आम आदमी पार्टी का प्रभाव ज्यादा
प्रदेश में एक मात्र विधानसभा है, जहां वर्ष 2018 में आम आदमी पार्टी का प्रभाव रहा है। यहां आप को 21 फीसदी, कांग्रेस को 22 और भाजपा को 24 फीसदी वोट मिले हैं। इसी के चलते दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आप के बड़े नेताओं का फोकस विंध्य क्षेत्र के रीवा, सीधी सतना की तरफ रहा है।
आदिवासी बहुल सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस का फोकस
आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर भाजपा के पक्ष में वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए पिछले दो वर्षों में भाजपा के कई कार्यक्रम हुए। आदिवासियों को खुश करने के लिए पेसा एक्ट लाया गया। रघुनाथ शाह, शंकर शाह सहित अन्य आदिवासियों से जुड़े महापुरुषों से जुड़े कार्यक्रम किए गए। इन कार्यक्रमों के जरिए भाजपा ने अपनी कमजोर सीट ब्यौहारी, शहपुरा, डिंडोरी, धार, झाबुआ, बालाघाट, परसवारड़ा, निवास, अनूपपुर सहित अन्य 20 सीटों पर पैठ बनाने की कोशिश की है। कांग्रेस भी आदिवासी बहुल में लगातार सभा कर रही है।
सपा के अखिलेश यादव की विंध्य, ग्वालियर में सभाएं
इस विधानसभा चुनाव में भी सपा का पूरा फोकस विंध्य, ग्वालियर और चंबल संभाग की तरफ है। पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित अन्य नेताओं की चुनावी सभाएं इन्हीं क्षेत्रों में की जा रही हैं। मालवा-निमाड़ में पार्टी का प्रभाव कम है, इसके चलते इन नेताओं ने इस क्षेत्र में चुनावी दौरा नहीं हुआ।
एक्सपर्ट कमेंट
यह बात सही है कि उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे हुए जो हिस्सा है वहां बीएसपी का प्रभाव है। प्रदेश में पिछले 10 सालों में बीएसपी का कोर वोटबैंक बीजेपी की तरफ शिफ्ट हुआ है। बीजेपी की पूरी कोशिश है उसका वोट बैंक बना रहे और बढ़त भी हो। -जयराम शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार