
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हर साल राम भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। श्री विष्णु को राम अवतार के वक्त सहयोग करने के लिए रुद्रावतार हनुमान जी का जन्म हुआ था। पवनपुत्र हनुमानजी ने रावण का वध, सीता की खोज और लंका पर विजय पाने में श्रीराम की पूरी सहायता की थी। हनुमान जी के जन्म का उद्देश्य ही राम भक्ति था। चलिए जानते हैं हनुमान जन्मोत्सव की तिथि, महत्व और पूजा विधि के बारे में।
31 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग
हनुमान जयंती का पर्व इस साल बड़े ही दुर्लभ संयोग के साथ आया है। ज्योतिषियों का कहना है कि हनुमान जयंती इस वर्ष 16 अप्रैल, दिन शनिवार को पड़ रही है जो कि बजरंगबली का प्रिय दिन है। साथी ही, इस दिन शनि मकर राशि में विराजमान रहेंगे। ये दुर्लभ संयोग 31 साल बाद बन रहा है।
मकर राशि में शनि और शनिवार को हनुमान जयंती का ये विशेष संयोग 2022 से पहले 1991 में बना था। बता दें कि हनुमान जी का जन्म त्रेता युग में चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा को सुबह के वक्त हुआ था, इस दिन मंगलवार था।
शुभ मुहूर्त
हनुमान जयंती पर सुबह 8 बजकर 40 मिनट तक हस्त नक्षत्र है। इसके बाद चित्रा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। ये दोनों नक्षत्र मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं। वहीं, अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 55 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
पूजन सामग्री
हनुमान जन्मोत्सव के दिन पूजा के दौरान हनुमान जी के लिए इस पूजन सामग्री की आवश्यकता होगी। लाल लंगोट, जल कलश, जनेऊ, गंगाजल, पंचामृत, सिन्दूर, चांदी/सोने का वर्क, लाल फूल और माला, भुने चने, गुड़, इत्र, पान का बीड़ा, केले, सरसो का तेल, नारियल, चमेली का तेल, तुलसी पत्र, दीपक, धूप, घी, अगरबत्ती, कपूर इत्यादि।
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पूजा विधि
- भगवान हनुमान को प्रसन्न करने के लिए चौमुखी दीपक जलाएं। इसके अलावा हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।
- हनुमान जी को गेंदे, कनेर, गुलाब के फूल अर्पित करें।
- प्रसाद के रूप में मालपुआ, लड्डू, चूरमा, केला, अमरूद आदि का भोग लगाएं।
- हनुमान जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।
- हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाएं इससे मनोकामना की शीघ्र पूर्ति होती है।