
ग्वालियर। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। यह कहावत बरई में हुई बच्चों की रेस में एक मासूम दिव्यांग बालक ने सच कर दिखाई। पूर्ण रूप से दिव्यांग कक्षा तीन के इस बालक ने सौ मीटर की रेस को बिना पूरा किए दम नहीं लिया। सभी दिव्यांग बच्चों के रेस पूरा करने के बाद भी यह बालक रेस में दौड़ता रहा, जिसने रेस पूरी की और सबका दिल जीत लिया। जिसके बाद आयोजन के अतिथि एसडीओपी घाटीगांव संतोष पटेल ने बालक को गोद में उठाया तो सभी ने उसे माला पहनाकर दिव्यांग बच्चे के हौसले की तारीफ की।
दरअसल शनिवार को घाटीगांव ब्लॉक के अन्तर्गत आने वाले सभी स्कूलों के दिव्यांग बच्चों की सौ मीटर रेस का आयोजन बरई में किया गया। जहां पुरानी छावनी संकुल के जिगसौली विद्यालय के कक्षा तीन के दिव्यांग बालक आयुष रजक का उसके पिता ने हौसला नहीं टूटने दिया। बच्चे की जिद थी कि उसे इस रेस में दौड़ना है, जिसको पूरा करने के लिए पिता करन रजक ने साइकिल से 35 कि.मी. दूर का सफर तय करके बच्चे को दिव्यांग बच्चों की रेस में पहुंचाया। दिव्यांग बालक के हौसले इतने बुलंद थे कि वह रेस में सबसे पीछे रहा, लेकिन उसने रेस पूरी कर सबका दिल जीत लिया।
पिता ने बेटे की जिद की पूरी
बेटे की जिद को पूरा करने आयुष के पिता करन रजक ने 35 किलोमीटर का सफर साइकिल से तय किया और उसका हौसला नहीं टूटने दिया। बेटा दिव्यांग बच्चों की रेस में दौड़ा और हारकर भी सबका दिल जीत ले गया।
चीफ गेस्ट ने गोद में उठाया
दिव्यांग बालक के हौसले को देखते हुए कार्यक्रम के चीफ गेस्ट एसडीओपी घाटीगांव संतोष पटेल ने उसे गोद में उठा लिया। जिसके बाद सभी ने बच्चे के हौसले की तारीफ करते हुए उसे माला पहनाकर सांत्वना पुरस्कार दिया।