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फिल्म सब्सिडी : मध्य प्रदेश आइए, कुछ बेहतर प्रोजेक्ट बनाइए

मध्य प्रदेश में फिल्म को रोजगार से जोड़ती है मध्य प्रदेश सरकार (टूरिज्म) की फिल्म सब्सिडी योजना

‘एंटरटेनमेंट…एंटरटेनमेंट…एंटरटेनमेंट’ सिनेमा की सिर्फ इतनी सी परिभाषा नहीं है। सिनेमा सिर्फ सांस्कृतिक या ऐतिहासिक विरासत के विजुअलाइजेशन का प्रतीक नहीं है। सिनेमा केवल सांस्कृतिक समृद्धि तक का द्योतक नहीं है। सिनेमा; देश की आर्थिक और सामाजिक सौभाग्य-सम्पन्नता का परिचायक भी है। जो देश इस मायने में पिछड़े हैं या सक्षम नहीं हैं, वहां सिनेमा का या तो ‘दि एंड’ हो चुका है या हाशिये पर पड़ा है। उदाहरण के तौर पर पाकिस्तान। पड़ोसी मुल्क में सिनेमाई कला का पतन हो चुका है।

दुनिया में कुछ देश ही ऐसे हैं, जहां सिनेमा लगातार प्रगति कर रहा है, नए-नए प्रयोग कर रहा है। लाखों लोगों को रोजगार दे रहा है और अपने देश का गौरव बढ़ा रहा है। भारतीय सिनेमा इस परिप्रेक्ष्य में दुनिया में अपनी धाक रखता है। यहां सिर्फ हिंदी भाषा में ही फिल्में नहीं बनतीं, बल्कि दक्षिण भारतीय भाषाओं से लेकर पंजाबी-हरियाणवी, बुंदेलखंडी, राजस्थानी तमाम क्षेत्रीय भाषा में सिनेमा रचा जा रहा है। ये इस बात को दर्शाता है कि भारत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तौर पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी अग्रसर है। भारत सरकार के लिए फिल्म निर्माण मुख्य विषय है। इसका प्रमाण मध्य प्रदेश सरकार की ‘फिल्म पर्यटन नीति’ है।

‘फिल्म नीति’ के माध्यम से न सिर्फ फिल्म निर्माता को अनुदान के रूप में आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है, बल्कि फिल्म कला-विधा से जुड़ीं तमाम प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना का भी प्रयास किया जा रहा है।
यदि फिल्म निर्माता मध्य प्रदेश के स्थानीय कलाकारों को परियोजना में कार्य का अवसर प्रदान करते हैं, तो ऐसे फिल्म निर्माताओं को अतिरिक्त अनुदान प्रदान किया जाता है।

अकसर कुछ सवाल पूछे जाते हैं। पहला-मध्य प्रदेश सरकार (टूरिज्म) की फिल्म सब्सिडी योजना क्या है? तो जान लीजिए कि मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार एवं फिल्मांकन के दौरान क्षेत्रीय रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश फिल्म पर्यटन नीति 2020 मार्च से लागू की गई।

दूसरा सवाल उठता है कि सब्सिडी के लिए पैमाना क्या है? तो यहां बताना जरूरी है कि अगर कोई मध्य प्रदेश में अपनी पहली फिल्म की शूटिंग कर रहा है, तो उसे फिल्म की कुल लागत की 25 प्रतिशत या 1 करोड़ रुपए तक कर सब्सिडी मिलती है। इसमें फिल्म की 50 प्रतिशत शूटिंग मध्य प्रदेश में करना अनिवार्य है। अगर कोई अपनी फिल्म 75 प्रतिशत शूटिंग मध्य प्रदेश में करता है, तो उसे कुल प्रोडक्शन कास्ट का 25 प्रतिशत या 1.50 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी मिलती है।

ऐसे ही अगर कोई फिल्ममेकर अपनी दूसरी फिल्म की शूटिंग मध्य प्रदेश में कर रहा है, तो इन्हीं शर्तों के हिसाब से 1.25 करोड़ रुपए या 1.75 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी मिल जाती है।

तीसरी फिल्म की शूटिंग के लिए भी इसी अनुपात में अगर मध्य प्रदेश में 50 प्रतिशत शूटिंग होती है, तो कुल लागत की 25 प्रतिशत या अधिकतम 1.50 करोड़ रुपए और 75 प्रतिशत शूट मध्य प्रदेश में होने पर 2 करोड़ रुपए या कुल लागत की 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है।

अगर टीवी शोज या सीरियल्स की बात करें, तो मध्य प्रदेश में न्यूनतम 50 दिन की शूटिंग करने पर शो की कुल लागत की 25 प्रतिशत या अधिकतम 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिलेगी। वहीं, 180 दिन शूट करने पर कुल प्रोडक्शन कास्ट की 25 प्रतिशत या अधिकतम 1 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी का प्रावधान है।

इसी तरह ओटीटी प्‍लेटफार्म पर प्रदर्शित होने वाली वेब सीरीज या ओरीजनल शो के लिए भी मध्य प्रदेश सरकार सब्सिडी देती है। इसमें राज्य में न्यूनतम 50 प्रतिशत शूट करने पर कुल लागत की 25 प्रतिशत या 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जाती है। वहीं, न्यूनतम 75% शूटिंग दिवस मध्‍य प्रदेश में होंने पर एक करोड़ रुपए तक या वेब सीरीज/ओरीजनल शो की कुल लागत का 25% सब्सिडी के तौर पर मुहैया होता है।

मध्य प्रदेश सरकार डॉक्यूमेंट्री के लिए भी सब्सिडी देती है। इसमें राष्‍ट्रीय स्‍तर पर रिलीज होने वाली डाक्‍यूमेन्‍ट्री फिल्‍म के लिए 20 लाख रुपए तक या कुल परियोजना लागत का 50% तक जो भी कम हो सब्सिडी के तौर पर मिलता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्‍तर पर रिलीज होने वाली डाक्‍यूमेन्‍ट्री फिल्‍म के लिए 40 लाख रुपए तक या कुल परियोजना लागत का 50% तक जो भी कम हो सब्सिडी के रूप में प्रदेश सरकार देती है।

ये मध्य प्रदेश सरकार की पहल ही है कि पिछले 5 साल में ‘फिल्म पर्यटन नीति 2020’ के 6 हिंदी फीचर फिल्मों, 1 तेलुगु फीचर फिल्म और 4 वेबसीरीज यानी कुल 11 प्रोजेक्ट को वित्तीय सब्सिडी वितरित की गई है। इनमें हिंदी फिल्में-दुर्गामती, शेरनी, छोरी, सेल्फी, जनहित में जारी, मेरे देश की धरती के अलावा तेलुगु फीचर फिल्म तप्पिन्चुकोलेरू शामिल हैं। वहीं, वेब सीरीज- गुल्लक सीजन–2 और 3, निर्मल पाठक की घर वापसी के अलावा पंचायत सीजन–2 शामिल है।

जब फिल्मांकन की बात आती है, तो फिल्म निर्माता को विश्व विरासत से लेकर धार्मिक, वन्य जीवन तक सभी प्रकार के स्थान उपलब्ध हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य की स्थानीय सरकार और कानून-व्यवस्था की स्थिति शूटिंग के लिए अनुकूल है एवं फिल्मांकन को सरल बनने हेतु राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है।

शिवशेखर शुक्ला
(प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, मप्र शासन)

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