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PM मोदी का विवेकानंद रॉक पर 45 घंटे का ‘तप’ : ध्यान-मौनव्रत और केवल लिक्विड डाइट… 1 जून तक कन्याकुमारी में रहेंगे

कन्याकुमारी। पीएम मोदी की ‘ध्यान साधना’ विवेकानंद रॉक मेमोरियल में जारी है। कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल के ध्यान मंडपम में 45 घंटे का ध्यान कर रहे हैं, जिसका आज दूसरा दिन है। पीएम यहां 1 जून तक ध्यानमग्न रहेंगे। इस दौरान पूरे कन्याकुमारी में 2 हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके साथ ही तमिलनाडु पुलिस का कोस्टल सिक्योरिटी ग्रुप, कोस्ट गार्ड और नेवी को भी तैनात किया गया है।

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सिर्फ तरल आहार लेंगे पीएम मोदी

पीएम के ध्यान की पहली तस्वीरें सामने आ गई हैं। जिसमें वे ॐ के सामने बैठकर ध्यान लगाते नजर आ रहे हैं। अपने 45 घंटे के ध्यान के दौरान पीएम मोदी सिर्फ तरल आहार लेंगे, वह केवल नारियल पानी और अंगूर के जूस का सेवन करेंगे। पीएम मोदी मौन व्रत का पालन भी करेंगे और ध्यान कक्ष से बाहर नहीं निकलेंगे।

लोकसभा चुनाव प्रचार का शोर थमते ही पीएम मोदी गुरुवार (30 मई) की शाम कन्याकुमारी पहुंचे थे। प्रधानमंत्री ने सबसे पहले भगवती देवी अम्मन मंदिर (कन्याकुमारी मंदिर) में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुंचे, जहां पर ध्यान शुरू किया।

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2019 में केदारनाथ गए थे पीएम मोदी

समुद्र के बीच स्थित स्मारक पर पीएम मोदी के 45 घंटे के प्रवास के लिए भारी सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। बता दें कि पीएम मोदी ने 2019 के चुनाव अभियान के बाद केदारनाथ गुफा में इसी तरह का प्रवास किया था। वहां बनी रुद्र गुफा में 17 घंटे ध्यान लगाया था। ध्यान के बाद बद्रीनाथ के दर्शन करने भी गए थे। पीएम मोदी गुरुवार की शाम से 1 जून की शाम तक ध्यान मंडपम में ध्यान करेंगे। जहां माना जाता है कि विवेकानन्द ने ‘भारत माता’ के बारे में दिव्य दृष्टि प्राप्त की थी।

कन्याकुमारी को क्यों चुना ?

पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि पीएम मोदी ने अपने आध्यात्मिक प्रवास के लिए कन्याकुमारी को इसलिए चुना क्योंकि वह देश में विवेकानंद के दृष्टिकोण को साकार करना चाहते हैं। उन्हें यह विश्वास है कि चार जून को मतगणना होने के बाद वह तीसरी बार सत्ता में वापस लौटेंगे। जिस स्थान पर प्रधानमंत्री ध्यान लगाएंगे उसका विवेकानंद के जीवन पर बड़ा प्रभाव था और यह भिक्षु के जीवन में इसका वही महत्व है जो गौतम बुद्ध के लिए सारनाथ का है। पूरे देश में घूमने के बाद विवेकानंद यही पहुंचे थे। उन्होंने यहां तीन दिन तक ध्यान लगाया और एक विकसित भारत का सपना देखा था।

भाजपा के एक नेता ने कहा- उसी स्थान पर ध्यान करना स्वामी जी के विकसित भारत के दृष्टिकोण को जीवन में लाने की पीएम मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस स्थान को पवित्र ग्रंथों में भगवान शिव के लिए देवी पार्वती के ध्यान स्थल के रूप में भी जाना जाता है। यह स्थान भारत का सर्वाधिक दक्षिणी छोर है। यह वह स्थान है जहां पर पूर्वी और पश्चिमी तटरेखाएं मिलती हैं और हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर मिलते हैं। पीएम मोदी कन्याकुमारी जाकर राष्ट्रीय एकता का संकेत दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह तमिलनाडु के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता और स्नेह को भी दर्शाता है कि वह चुनाव खत्म होने के बाद भी राज्य का दौरा कर रहे हैं।

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